
काईस (कुल्लू)। ब्यास की धारा को मैली होने से बचाने के लिए प्रशासन और नगर परिषद ने भले ही कडे़ नियमों का प्रावधान कर रखा हो लेकिन इसके बावजूद नदी में बदस्तूर कूड़ा कर्कट फेंका जा रहा है। नदियों में बढ़ता यह प्रदूषण मानव जीवन के साथ जल के जीवों के लिए घातक है। कुछ लोगों की लापरवाही तथा प्रशासन और सरकार की अनदेखी के चलते ब्यास और पार्वती नदियां लगातार प्रदूषण की जद में आने लगी हैं। प्रशासन और स्थानीय नगर परिषद के कड़े कानून भी इस पर रोक नहीं लगा पाए हैं। मनाली से लेकर मणिकर्ण-भुंतर समेत कुल्लू शहर की तमाम गंदगी ब्यास नदी में फेंकी जा रही है। सीवरेज की भी अधिकतर गंदगी ब्यास नदी में बहाई जा रही है।
प्रदूषित होती इन नदियों को बचाने के लिए न तो सामाजिक संस्थाएं और न ही सरकार की ओर से कोई ठोस नीति बनाई जा रही है। हिमालयन पर्यावरण प्रोटेक्शन सोसाइटी के अध्यक्ष अभिषेक राय ने इस पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा ब्यास नदी एवं शहर को प्रदूषण मुक्त बनाए रखने के लिए जो कदम उठाए हैं, उन पर अमल नहीं हो रहा। इस संबंध में जिला प्रशासन के खिलाफ अवमानना संबंधी पत्र उच्च न्यायालय को भेजा जाएगा।
समय-समय पर करते हैं निरीक्षण : डीसी
उपायुक्त शरभ नेगी ने बताया कि नदी नालों में कूड़ा कर्कट न फेंके इसके लिए हाईकोर्ट के सख्त निर्देश मिले हैं। नगर परिषद और आईपीएच महकमा समय-समय पर निरीक्षण करता है। पकड़े जाने पर कार्रवाई की जाती है।
74 लोगों के काटे हैं चालान : कालिया
नगर परिषद के अध्यक्ष ऋषभ कालिया ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेशों का पालन किया जा रहा है। ब्यास को प्रदूषण मुक्त होने से बचाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसके अलावा जहां तहां कूड़ा कर्कट फेंकने वाले 74 लोगों के चालान भी काटे हैं।
350 परिवारों को भेजे हैं नोटिस
आईपीएच विभाग कुल्लू के अधिशासी अभियता उपेंद्र वैद्य ने बताया कि सीवरेज लेने से आनाकानी कर रहे करीब 350 परिवारों को नोटिस भेजे हैं। सीवरेज के गंदे पानी को ट्रीटमेंट करने बाद ही ब्यास में छोड़ा जाता है।
