
कुल्लू। सुधांशु महाराज ने कहा कि विश्व जागृति मिशन सत्संग और ध्यान योग कार्य के साथ समाज सेवा के काम में भी जुटा है। मिशन देश के गरीब बच्चों को शिक्षा प्रदान करने में जुटा है। इसकी शुरुआत में मिशन ने देश में आदि वासी क्षेत्रों में दो स्कूल खोले हैं। इन स्कूलों में 600 अनाथ बच्चों को शिक्षा दी जा रही है। इसमें 150 बच्चे इन्हीं स्कूलों में रहते हैं।
यह स्कूल झारखंड के खुंटी और रुका के आदिवासी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में खोले हैं। यहां पर मिशन आदि बच्चों को शिक्षा प्रदान कर जागरूक कर रहा है। इसके अलावा मिशन ने सूरत गुजरात और कानपुर यूपी में भी दो बालश्रम खोले हैं जहां पर 300 से अधिक गरीब बच्चों के भविष्य को संवारा जाता है।
कुल्लू में पत्रकारों से बातचीत में सुधांशु महाराज ने कहा कि स्लम डॉग मिलियनेर फिल्म को देखकर अमेरिका के लोग भारतीय का बहुत मजाक उड़ाते हैं। इसलिए उन्होंने स्लम एरिया और झुग्गी झोपड़ियों के बच्चों को शिक्षा देने के लिए फरीदाबाद में एक स्कूल खोला है। इसमें दिल्ली और आपस के बच्चे अपने काम करने के साथ-साथ पढ़ाई करते हैं। इस स्कूल में करीब 1000 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इन बच्चों को पढ़ाई के बाद कंपनियों से बातचीत कर रोजगार दिलाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने अनाथ बच्चों को भी नौकरी में आरक्षण दिया जाना चाहिए।
माता-पिता का सम्मान करें युवा : सुधांशु
कुल्लू। सुधांशु महाराज ने कहा कि हमें अपने माता-पिता का सम्मान करना चाहिए। उन्हें बुढ़ापे में बेसहारा नहीं छोड़ना चाहिए। इसके अलावा बुजुर्गों को भी बच्चों से सही व्यवहार करना चाहिए। कहा कि आजकल अधिकतर लोग अपने बड़े बुजुर्गों को बेसहरा छोड़ रहे हैं। इस कारण देश में भी वृद्धा आश्रम खोलने पड़ रहे हैं। हिंदु संस्कृति में बड़े बुजुर्गों का सम्मान करने की संस्कृति है। उन्होंने बताया कि जागृति मिशन हर वर्ष पहले शारदीय नवरात्र और दो अक्तूबर पर श्रद्धा दिवस मनाता है। इस पर अपने माता-पिता और बड़े बुजुर्गों का सम्मान किया जाता है।
