
चंबा। जिला परिषद की बैठक में आचार संहिता के चलते मनरेगा का शेल्फ नहीं रखा जा सका है। इससे जिला परिषद हैड से मनरेगा के होने वाले कार्य को स्वीकृति मिलने का इंतजार और बढ़ गया है। इस बार शेल्फ तीन माह लेट हो सकता है। इससे विकास कार्यों की गति धीमी होगी। इसका सीधा असर जिला की जनता पर पड़ेगा। जिला परिषद में बजट पास होने से जिप हेड से कार्य शुरू होने की आस लगाए बैठे लोगों की उम्मीदों को भी झटका लगा है। ज्ञात रहे कि पहले ही जिप सदस्यों ने पंचायतों को अधिकार दिए जाने के कारण शेल्फ बनाने में देरी की है, अब आचार संहिता के आड़े आने से विकास की गति थमने के आसार हैं। अब जुलाई माह में ही मनरेगा के शेल्फ को पारित होने की प्रक्रिया शुरू हो पाएगी। जिला पंचायत अधिकारी रमेश चंद कपूर ने बताया कि आचार संहिता के चलते जिप की बैठक शेल्फ नहीं रखा जा सका। आचार संहिता के हटने के बाद ही आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। जिला परिषद की बैठक में जिला परिषद अध्यक्ष संतोष ठाकुर, जिला पंचायत अधिकारी रमेश चंद कपूर, काहरी वार्ड की जिला परिषद सदस्य सुदेश ठाकुर, कीड़ी वार्ड के राज सिंह ठाकुर, जडेरा वार्ड संगीता देवी, अमित भरमौरी मौजूद रहे। इस अवसर पर पंचायती राज विभाग द्वारा जिला परिषद सदस्यों को मनरेगा के कार्य के लिए ग्रामसभा में प्रस्ताव पारित करवाने के आदेशों का जिप परिषदों ने विरोध जताया है। जिप परिषद सदस्यों ने कहा कि प्रदेश में ग्रामसभाओं का आयोजन एकसाथ एक ही दिन किया जाता है। एक जिप सदस्य के अधीन एक दर्जन से अधिक पंचायतें आती हैं। इसलिए एक सदस्य एक ही दिन इतनी पंचायतों में जाकर प्रस्ताव पास करवाना असंभव है। काहरी वार्ड सदस्य सुदेश ठाकुर ने कहा कि इस प्रणाली में बदलाव जरूरी है। बैठक में उपस्थित समस्त जिला परिषद सदस्यों इस प्रक्रिया में बदलाव करने का समर्थन किया।
