सूबे की दूसरी राजधानी में डाक्टरों की दरकार

धर्मशाला। स्वास्थ्य विभाग की ओर से बेशक जिला मुख्यालय धर्मशाला स्थित क्षेत्रीय अस्पताल को आईएसओ सार्टिफिकेट जारी हुआ है मगर स्टाफ की कमी के चलते यहां मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
प्रदेश की दूसरी राजधानी धर्मशाला के अस्पताल में चिकित्सकों के कई पद खाली चल रहे हैं। इस कारण मरीजों को उपचार करवाने में परेशानी पेश आ रही है। अस्पताल में चिकित्सकों के 37 पद स्वीकृत हैं मगर मौजूदा समय में यहां 26 चिकित्सक ही सेवाएं दे रहे हैं। 11 चिकित्सकों के पद खाली होने के कारण मरीजों को उपचार करवाने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। सेवाएं दे रहे चिकित्सकों को भी अतिरिक्त काम करना पड़ रहा है। अस्पताल में हालात ऐसे हो गए हैं कि जब एक साथ चार से पांच चिकित्सक छुट्टी पर चले जाएं तो तैनात चिकित्सकों को दिन और रात में भी सेवाएं देनी पड़ती हैं। अस्पताल में हर रोज 800 के करीब मरीज चेकअप करवाने आते हैं। इसके अलावा मेडिकल और अन्य मेडिकल संबंधी दस्तावेज बनवाने आने वाले लोगों को भी लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

जल्द भरे जाएं चिकित्सकों के पद
रोटरी क्लब के डिस्ट्रिक चेयरमैन वीरेंद्र परमार ने बताया कि क्षेत्रीय अस्पताल में डाक्टराें की कमी के चलते मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। व्यापार मंडल धर्मशाला के प्रधान रविकांत सोनू ने बताया कि लंबे समय से अस्पताल में खाली पदों को भरने में सरकार ध्यान नहीं दे रही है। समाजसेवी रोशन लाल नरुला ने बताया कि धर्मशाला प्रदेश की दूसरी राजधानी है। यहां पर पर्यटकों का आना जाना भी लगा रहता है। दलाईलामा का निवास स्थान भी यहां पर होने के कारण बहुतायत में बाहर से आए पर्यटक अस्पताल में इलाज करवाते हैं। खाली पदों को न भरा जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। धर्मशाला निवासी संजीव कुमार और दिनेश कुमार ने बताया कि पद खाली होने के कारण रेफर होकर आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

उच्च अधिकारियों को करवाया अवगत : एमएस
एमएस डा. राकेश शर्मा ने बताया कि जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 11 पद खाली चल रहे हैं। एमओ के पद भरने के लिए आला अधिकारियों को अवगत करवाया गया है। जैसे ही पदों को भरा जाएगा अस्पताल में चिकित्सकों की तैनाती कर दी जाएगी। पद खाली होने से काम काफी हद तक प्रभावित हो रहा है।

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