
शिमला। राजधानी शिमला में महापौर और उप महापौर को नगर निगम की सत्ता संभाले आज एक साल पूरा हो गया। माकपा से संबद्ध महापौर संजय चौहान और उप महापौर टिकेंद्र पंवर ने चुनावी घोषणा पत्र में सभी को पर्याप्त पानी, पार्किंग और गरीबों को घर देने का वायदा किया। हर घर को सीवरेज कनेक्टिविटी देने के नाम पर वोट लिए। लेकिन एक साल बाद भी ये समस्याएं जस की तस हैं।
आर्थिक तंगी के चलते बीते साल कर्मियों को तनख्वाह देने के लिए कई बार फिक्स डिपॉजिट तक प्री मैच्योर करवाने पड़े हैं। कर्मचारी मांगों को लेकर हर माह दफ्तर के बाहर नारे लगा रहे हैं। पार्षद भी निगम सदन में अपने वार्ड की दुर्दशा का ढिंढोरा पीट रहे हैं। राज्य सरकार से खाली झोली भरने की उम्मीद लेकर भले ही महापौर और उप महापौर कई बार मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रियों से मिले लेकिन हासिल कुछ नहीं हुआ। यही नहीं, कुछ योजनाओं को केंद्र सरकार से मिली राशि भी लैप्स होने की कगार पर है।
मर्ज एरिया के लोग आज भी अपने भवन नियमित होने की आस में हैं। इन क्षेत्रों के लोगों को भवन नियमित नहीं होने के चलते व्यावसायिक दरों पर पानी और बिजली कनेक्शन लेने पड़े हैं। पानी की समस्या वैसी ही है। पार्किंग किल्लत हो या स्ट्रीट लाइटें, आवारा कुत्तों का खौफ हो या बंदरों का, किसी भी समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका है। शहरी गरीबों को आशियाना देने की योजना फाइलों में दम तोड़ रही है। कई वार्डों में एंबुलेंस रोड तक नहीं हैं।
