
चंबा। जिला आयुर्वेदिक विभाग के 50 आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों को अपने भवन नहीं मिल पाए हैं। वर्तमान में ये केंद्र किराये के भवनों और दान के भवनों में चल रहे हैं। जिला में चल रहे 103 आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों में 30 केंद्र किराये के तथा 23 केंद्र दान के भवनों में चल रहे हैं। किराये के भवनों का हर माह स्वास्थ्य विभाग को हजारों का किराया चुकाना पड़ता है। हर वर्ष लाखों रुपए किराये का भुगतान विभाग को करना पड़ता है। दान के अधिकतर भवन विभाग को पंचायतों द्वारा उपलब्ध करवाए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में निजी व दान के भवनों में चल रहे आयुर्वेदिक संस्थानों की हालत काफी खस्ता हो चुकी है। इससे क्षेत्र के आयुर्वेदिक विभाग के कर्मियों सहित ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन केंद्रों में रखा सामान कई बार बारिश का पानी आ जाने से भी खराब हो जाता है। स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण के लिए भूमि न मिल पाना सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। विभाग का कहना है कि भवन निर्माण के लिए संबंधित क्षेत्र के इच्छुक ग्रामीण भूमि दान में दे दें तो जल्द भवन निर्माण के लिए धन की व्यवस्था कर दी जाएगी। आयुर्वेदिक विभाग के पास भवन निर्माण के धन का तो कोई अभाव नहीं है। भवन निर्माण के लिए जगह न मिल पाना सबसे बड़ी समस्या है। वर्तमान में सरकारी भवनों में मात्र 50 आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र ही सरकारी भवनों में चल रहे हैं। इन दिनों बीस के करीब भवनों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। जिला के ग्रामीण कई बार संबंधित क्षेत्रों में चल रहे खस्ताहालत आयुर्वेदिक भवनों के स्थान पर नए भवन निर्माण की मांग कर चुके हैं। जिला आयुर्वेदिक आफिसर डा. जय प्रकाश ने बताया कि विभाग भवन निर्माण करने के लिए प्रयास कर रहा है। जगह की व्यवस्था न होने के कारण भवनों का निर्माण नहीं हो पा रहा है। जिन क्षेत्रों में केंद्र निजी भवनों में चल रहे हैं। क्षेत्र के केंद्र के लिए भूमि देने के इच्छुक लोग विभाग से संपर्क कर सकते हैं।
