दो दिवसीय प्रादेशिक निरंकारी समागम का समापन

नादौन (हमीरपुर)। नादौन में ब्यास नदी के तट पर आयोजित प्रादेशिक निरंकारी समागम रविवार देर रात सम्पन्न हो गया। बाबा हरदेव सिंह जी के दर्शन करने के लिए रविवार को भी भारी संख्या में भीड़ एकत्रित हुई थी। समागम के समापन अवसर पर बाबा जी का आशीर्वाद प्राप्त किया। लोगों के सुखमय जीवन तथा आपसी प्रेम की कामना करते हुए श्रद्धालुओं को अपना आशीर्वाद दिया। नादौन व्यास पुल से लेकर नदी के तट के दूसरे छोर तक लगभग एक किलोमीटर के क्षेत्र में समागम के लिए की गई व्यवस्था देखने योग्य थी। समागम स्थल पर लोगों की हर आवश्यकता का ध्यान रखा गया था। साथ-साथ अगिभनशमन यंत्र भी स्थापित किए गए थे। सेवादारों ने न केवल समागम स्थल पर अनुशासन बनाए रखने में अपना पूर्ण योगदान दिया, बल्कि यातायात व्यवस्था को भी नियंत्रित करने के लिए दिन रात जुटे रहे। सोमवार प्रात: बाबा हरदेव सिंह नादौन से रवाना हो गए। भक्तों ने भारी मन से बाबा जी को विदा किया। विदाई के समय सत्संग का आयोजन किया गया।

लोहे के कड़ाहे बने आकर्षण का केंद्र
नादौन (हमीरपुर)। नादौन में आयोजित संत निरंकारी समागम में हजारों लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था करना कठिन कार्य था परंतु लंगर व्यवस्था में लगे सेवादारों ने कार्य को बखूबी निभाया। व्यास नदी के तट पर बनाए गए अस्थायी लंगर में भोजन बनाने वाले विशालकाय बर्तन आकर्षण का केंद्र बने रहे। समागम में लंगर के लिए लाए गए लोहे के बडे़-बडे़ कड़ाहे तथा रोटियां सेंकने वाले बडे़ तवे आकर्षक का केंद्र रहे। करीब 5 क्विंटल वजनी कड़ाहों में 5-5 क्विंटल दाल पकाने के बाद एक बार में बनाई जा सकती है। 10 आदमी कड़ाहों को उठाने के लिए लगते हैं। कड़ाहे गर्म होने में ही करीब डेढ़ क्विंटल लकड़ी लग जाती है। एक क्विवंटल चावल एक कड़ाहे में बन सकते हैं। दिन रात विशालकाय बर्तनों की सहायता से भोजन पकाने का सिलसिला चलता रहा। अमर नाथ निरंकारी ने बताया कि जब इनका इस्तेमाल न हो तो कड़वा तेल डालकर रखा जाता है।

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