
शिमला। नशे की ओवरडोज से होटल मैनेजमेंट के एक छात्र की मौत हो गई है। 22 साल का छात्र कांगड़ा जिले के धर्मशाला का रहने वाला था। छात्र के सिर से माता-पिता का साया पहले ही उठ चुका था। शिमला के संजौली में रिश्तेदार के पास रहता था। रविवार रात युवक को गंभीर हालत में आईजीएमसी ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। संजौली पुलिस ने जब छात्र के कमरे की तलाशी ली तो वहां से नशीले कैप्सूल के खाली पत्ते मिले हैं। सभी पत्तों से 119 कैप्सूल गायब थे। पुलिस का कहना है कि इनके सेवन से ही छात्र की मौत हुई है। छात्र की मौसी को सूचित कर दिया गया है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है।
छात्र एक निजी शिक्षण संस्थान में होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहा था। रविवार को इसे दो अन्य युवकों के साथ देखा गया था। पुलिस ने इस मामले में पड़ोस में रहने वाले लोगों से पूछताछ की। इसके अलावा छात्र के सहपाठियों के भी बयान लिए जाएंगे। डीएसपी सिटी पंकज शर्मा ने कहा कि होटल मैनेजमेंट के छात्र की मौत नशे की ओवरडोज से हुई है। परिजनों को सूचित कर शव सौंप दिया गया है। मामले की छानबीन चल रही है।
क्या कहते हैं मनोचिकित्सक
आईजीएमसी में तैनात मनोचिकित्सक डा. दिनेश शर्मा का कहना है कि नशे की चपेट में सबसे अधिक युवा वर्ग है। स्कूलों-कॉलेजों के सबसे अधिक मामले आते हैं। कई मामले ऐसे भी हैं, जो नशे में पड़कर पढ़ाई छोड़ चुके हैं। बच्चों की गतिविधियों पर अभिभावक जरूर नजर रखें।
सबसे पहले अभिभावक ध्यान दें
बच्चे का अकेले रहने की जिद करना
जरूरत से अधिक चिड़चिड़ापन
आंखों में पीलापन और छोटापन
देर से घर आना और कम बातचीत
भूख न लगना सभी के साथ खाना न खाना
अधिकांश समय अकेले कमरे में बिताना
घर में महंगी चीजें और पैसों का गुम होना
ये करें अभिभावक
अपने बच्चों के कमरों की तलाशी लें
कपड़े मौजें और स्कूल कॉलेज बैग खंगालते रहें
पाकेट मनी में कटौती करें और नजर रखें
स्कूल कॉलेज की उपस्थिति जरूर देखें
दो-तीन दिन के लिए साथ में आउटिंग को ले जाएं
बाहर कहां जाता है, किससे मिलता है जरूर देखें
अगर नशाखोरी है तो प्यार से छूटेगी
नशे में गिरफ्त बच्चे को स्नेह दें
झाड़ फूंक नहीं, डाक्टरी इलाज करवाएं
मनोचिकित्सक से सलाह लें
एक दो सिटिंग बेहद जरूरी है
नशा छुड़ाने वाले केंद्रों में संपर्क करें
अकेले न छोड़ें समझाने की कोशिश करें
प्रतिबंधित दवाओं का बाजार
शहर में प्रतिबंधित दवाओं की खरीद फरोख्त पर शिकंजा नहीं कसा जा सका है। हालांकि पुलिस और स्वास्थ्य विभाग कोशिश करते हैं, लेकिन कोशिश पर्याप्त नहीं है। पड़ोस के हरियाणा, पंजाब राज्यों से नशीली दवाओं की तस्करी शिमला में होती है। पुलिस अधीक्षक अभिषेक दुल्लर ने कहा कि ऐसे लोगों पर नजर है। इन्हें रंगे हाथों पकड़ा भी गया है।
जान ले सकती हैं नशीली दवाएं
याददाश्त का लगभग शून्य हो जाना
किसी भी चीज से भय खत्म होना
8- 9 कैप्सूल का असर तीन दिन तक रहना
भूख, प्यास न लगना, आंखें सिकुड़ जाना
ओवर डोज के कारण हार्ट अटैक से मौत होना
नशा उतरने के बाद कुछ याद न रहना
