
बंगाणा (ऊना)। कुटलैहड़ भाखड़ा बांध के विस्थापितों को आज तक इंसाफ नहीं मिल पाया है और न ही उनकी व्यथा किसी ने सुनी है। बिलासपुर के विस्थापितों को इंसाफ मिला और उन्हें प्लाट अलाट किए गए। लेकिन, कुटलैहड़ में विस्थापितों को मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल पाई हैं। गोबिंदसागर झील पर पुल की मांग सालों से की जा रही है, लेकिन यह मांग पूरी नहीं हो सकी है। कई बार नेताओं ने विस्थापितों को सपने दिखाए। कई गांवों में स्वास्थ्य, सड़क की समस्या बनी हुई है। कई लोग झील से उठकर जंगलों में बसे, उनके अवैध कब्जे हैं, वह भी नियमित नहीं हो सके। पूर्व धूमल सरकार ने उनके कब्जों को नियमित करने की घोषणा की, लेकिन उसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। कुटलैहड़ भाखड़ा विस्थापित संघ ने लोगों की समस्याओं को पुनर्वास सलाहकार समिति के ज्ञापन के माध्यम से सामने रखा। संघ के अध्यक्ष देसराज मोदगिल का कहना है कि कोई सरकार कुटलैहड़ भाखड़ा बांध विस्थापितों के लिए चिंतित नहीं हैं। हरियाणा से लौट कर कुटलैहड़ में बसे विस्थापित भी सरकार से खफा हैं। विस्थापितों में सतपाल, सत नारायण, प्रकाश चंद, ज्ञान चंद, मुकेश, कमल समेत अन्य का कहना है कि पूर्व भाजपा सरकार ने कुटलैहड़ भाखड़ा बांध के विस्थापितों को न्याय नहीं दिया है। वर्तमान सरकार को इस बारे में शीघ्रता से कदम उठाने चाहिए। जिससे विस्थापितों की समस्याएं हल हो सकें।
