
नई दिल्ली। निसंदेह देशभर में दुष्कर्म के मामलों में वृद्धि हुई है लेकिन काफी मामलों में आपसी सहमति से बनाए शारीरिक संबंधों को भी दुष्कर्म का रूप दे दिया जाता है। कुछ मामलों में महिला प्रतिशोध, पैसों की उगाही व विवाह के लिए युवक को मजबूर करने के लिए कानून का इस्तेमाल हथियार के रूप में करती है। अगर ऐसा करने की इजाजत दी गई तो विवाह जैसा पवित्र रिश्ता मजाक बनकर रह जाएगा। हाईकोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में आरोपी रोहित चौहान को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके व एक अन्य जमानत राशि पर अग्रिम जमानत देते हुए यह टिप्पणी की।
न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर ने शालीमार बाग निवासी युवती द्वारा युवक पर दुष्कर्म करने व अश्लील फिल्म व फोटो यू-ट्यूब पर डालने के आरोप को संदेह के दायरे में लिया है। अदालत ने कहा कि युवती ने ढाई वर्ष तक युवक पर शारीरिक शोषण व धमकाने का आरोप लगाया। दूसरी ओर अदालत में पेश फोटो के अलावा लड़की ने स्वयं स्वीकार किया कि वह खुला जीवन जीने के अलावा शराब व सिगरेट आदि का सेवन करती है। ऐसे खुले विचारों वाली युवती को कमजोर नहीं माना जा सकता। इसके बावजूद उसने ढाई वर्ष तक शोषण के खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाई। जहां तक उनके बीच हुए विवाह की बात है वह भी संदेह के दायरे में है लेकिन वर्तमान में वे विवाह पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते क्योंकि मामला अदालत में विचाराधीन है।
क्या था मामला
शालीमार निवासी युवती ने पुलिस को बताया था कि वह रोहित से प्यार करती थी। आरोप है कि रोहित ने 14 फरवरी 2010 को अपने रानीबाग स्थित घर मां से मिलवाने के लिए उसे बुलाया और जबरन शारीरिक संबंध बनाए। इतना ही नहीं उसने किसी को बताने पर हत्या की धमकी भी दी। इसके बाद 9 जुलाई 2012 को भी रोहित ने जबरन शारीरिक संबंध बनाए व बाद में विवाह से इनकार कर दिया। युवती का कहना था कि पुलिस से शिकायत करने पर आर्य समाज मंदिर में रोहित ने उससे विवाह कर लिया लेकिन अब वह घर में नहीं आने देता।
