मानव को मानव हो प्यारा, एक दूजे का बनें सहारा

नादौन (हमीरपुर)। दो दिवसीय संत निरंकारी समागम के अवसर पर विश्व के नाम संदेश देते हुए निरंकारी बाबा हरदेव सिंह महाराज ने कहा कि मानवता ही सच्चा धर्म है। यदि धार्मिक बनना हो तो मानवीय गुणों से युक्त होना होगा। मानव को मानव हो प्यारा, एक दूजे का बनें सहारा। उन्होंने कहा कि इस समागम में हम इंसानियत के धर्म को विशाल रूप देने के लिए एकत्रित हुए हैं। आज के हालात पर चिंता व्यक्त करते हुए बाबा जी ने कहा कि संसार के हालात आज पीड़ाजनक हैं। लोग इंसानियत की चाल भूल बैठे हैं। लोभ, प्रलोभन, क्रूरता, अहंकार के लिए इंसान हैवान बनता जा रहा है। यदि मानव कण में इंसान है तो धर्म इतना मजबूत हो कि देवता बन जाए। हम सब में वासुदेव कुटुंबकम की भावना होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि नादौन में आप सभी श्रद्धा और भक्ति से प्रेरित होकर प्रकृति की सुंदर गोद में एकत्रित हुए हैं। जहां आप अपने भक्ति भाव में सुदृढ़ता लाना चाहते हैं, वहीं संसार को भी एक सुंदर जीवन जीने के लिए प्रेरणा देना चाहते हैं । बाबा जी ने कहा कि जीवन की सुंदरता, प्रेम, करुणा व दया सहनशीलता के कारण है। समाज में अमीर, गरीब, जाति धर्म, प्रांत, संस्कृति को लेकर जब विवाद होते हैं तो जीवन की सुंदरता समाप्त हो जाती है। इस समागम का उद्देश्य विश्व में प्रेम व भाईचारे का संदेश देना है। भाषा, संस्कृति, रिति रिवाजों, पहनावों में भिन्नता है परंतु अनेकता के होते हुए भी सत्य का बोध होने के बाद एकता के सूत्र में बंधा जा सकता है। इसी बोध के कारण ही भेदभाव की दीवारें गिरती हैं। जीवन प्रेममय और सुंदर हो जाता है।
उन्होंने कहा कि ईश्वर का धर्म तथा मानवता का धर्म ही केवल मात्र एक सच्चा धर्म है। ऐसे में सभी धर्म देशों, धर्मों तथा संस्कृतियों को मानने वाले लोग एक साथ रह सकते हैं। यहां भक्तों को विश्वास है कि सच्चा धर्म जोड़ता है, तोड़ता नहीं। इससे मानने वाले घट-घट में इसी एक का दर्शन करते हैं जिससे हमारे मन में भेदभाव, घृणा, द्वेष और हिंसा की भावना समाप्त हो जाती है। उन्होंने अरदास की कि विश्व में सब लोग एक दूसरे का सुख दुख बांटने वाले हों और सब के मन में यही धारणा हो।

Related posts