विदेशी नागरिक का कैसे बन गया आधार?

धर्मशाला। बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा की कथित जासूसी के आरोप में पकड़ा गया चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी और पब्लिक सिक्योरिटी ब्यूरो आफ चाइना (पीसीबी) का पूर्व सदस्य पेंपा छेरिंग विदेशी मूल से है। लिहाजा सवाल उठता है कि विदेशी नागरिक होने के नाते उक्त तिब्बती का दिल्ली में आधार कार्ड और पहचान पत्र कैसे बन गया। अगर ये दोनों कार्ड असली हैं तो इस मामले में दिल्ली की सरकारी एजेंसियां भी संदेह के घेरे में हैं।
धर्मशाला पुलिस की मानें तो उक्त व्यक्ति से विधानसभा क्षेत्र 20 चांदनी चौक के नाम पर बने दोनों कार्डों पर अलग-अलग नाम अंकित हैं। आधार कार्ड फुंचोक नामज्ञाल जबकि मतदाता पहचान पत्र पेंपा छेरिंग के नाम पर बनाया गया है। लेकिन जांच का विषय यह है कि काठमांडू स्थित तिब्बतियन रिसेप्शन सेेंटर के जरिए 2009 में भारत आए उक्त तिब्बती नागरिक का यहां आधार कार्ड कैसे बना? पुलिस सूत्रों के मुताबिक उक्त तिब्बती 25 अक्तूबर 2011 को धर्मशाला पहुंचा। उसके बाद से वह नोरबुलिंग स्थित तिब्बतियन पुनर्वास केंद्र में रह रहा है। हालांकि आरोपी तिब्बती की आरसी वैध है।

नहीं दे पाया संतोषजनक जवाब
इस बारे में पुलिस अधीक्षक कांगड़ा बलवीर ठाकुर का कहना है कि पूछताछ के दौरान पहचान पत्रों को लेकर उक्त तिब्बती कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया है। जबकि विदेशी होने के नाते ये पहचान पत्र नहीं बनाए जा सकते हैं। पुलिस ने खुफिया सुरक्षा एजेंसियों को इस बाबत सूचित कर दिया है। गहन छानबीन के बाद ही इस मामले में कुछ कहा जा सकता है।

इनसेट
खुफिया एजेंसियों ने डाला डेरा
संदिग्ध चीनी जासूस होने के संदेह पर धरे गए तिब्बती मूल के नागरिक से पुलिस सहित खुफिया एजेंसियों ने देर शाम तक पूछताछ की। आईजी नार्थ राकेश अग्रवाल स्वयं इस मौके पर मौजूद रहे। सूत्रों के मुताबिक पुलिस, सीआईडी और आईबी के अधिकारियों ने धर्मशाला में देर शाम आरोपी पेंपा छेरिंग से कड़ी पूछताछ की। हालांकि अभी तक उससे जासूसी के संबंध में किसी तरह का खुलासा नहीं हो पाया है

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