
बिलासपुर। राजकीय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ के दोफाड़ होने के आसार हैं। प्रदेश अध्यक्ष के दिशा-निर्देशों के आधार पर जिला इकाई के चुनाव के लिए 26 मई का दिन निर्धारित किया गया है, लेकिन एक गुट इस फैसले को असंवैधानिक बता रहा है। दूसरे गुट ने प्रदेश अध्यक्ष को पूर्व पदाधिकारी बताते हुए विधिवत तरीके से चुनाव न होने तक कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति भी कर दी है।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ की प्रदेश कार्यकारिणी ने गत अप्रैल माह में बिलासपुर समेत कुछ अन्य जिला इकाइयों के अध्यक्षों को निष्कासित कर दिया था। इस कार्रवाई के पीछे संगठन के संविधान के विपरीत कार्य करने का हवाला दिया गया था। बिलासपुर जिले में नई कार्यकारिणी के गठन को लेकर चुनाव के लिए 26 मई का दिन निर्धारित है। इसके लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए प्रकाश चंद गुलेरिया ने कहा कि 26 मई को अराजपत्रित कर्मचारी भवन में प्रदेश अध्यक्ष श्याम सिंह खाची की अध्यक्षता में दोपहर एक बजे से चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी। उन्होंने सभी विभागों में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मियों से इसमें उपस्थिति दर्ज कराने का आह्वान किया है।
उधर, दूसरे गुट ने संगठन के चुनाव के लिए जारी अधिसूचना को सिरे से नकार दिया है। इस गुट की ओर से बनाए गए कार्यकारी अध्यक्ष किशन लाल ठाकुर व महासचिव हरिकृष्ण शांडिल्य ने कहा कि श्याम सिंह खाची ने संभवतया सही ढंग से संघ का संविधान नहीं पढ़ा है। यदि पढ़ा होता तो वे बेतुके फैसले नहीं लेते। वह बताएं कि उन्होंने चुनाव का फैसला किसकी सहमति से लिया। वैसे भी उन्होंने आठ जिला अध्यक्षाें को निष्कासित करके स्वयं ही स्पष्ट कर दिया है कि राज्य कार्यकारिणी भी भंग हो गई है। कोई स्वयंभू नेता किसी जिले में चुनाव कराता है तो उसके कोई मायने नहीं है। कर्मचारियों द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए फैसले के अनुसार तब तक वे किशनलाल और हरिकृष्ण महासंघ का कामकाज संभालेंगे।
