गुच्छी का धड़ल्ले से हो रहा अवैध कारोबार

चुवाड़ी (चंबा)। क्षेत्र में अरसे से वन संपदा का अवैध रूप से कारोबार हो रहा है। प्रियंगुल, बनूनी, कैंथली, ददरियाड़ा, जोत और काहरी बीट में ग्रामीण काफी मात्रा में गुच्छियां एकत्रित करते हैं। हालांकि, इन बीटों में इक्का दुक्का कारोबारियों के पास ही परमिट है, जो गुच्छी की खरीद फरोख्त कर सकते हैं। इसके अलावा कुछ कारोबारी बिना परमिट के ही अवैध रूप से कारोबार करके खूब मुनाफा कमा रहे हैं। इससे रॉयलिटी के रूप में वन विभाग के खाते में जमा होने वाली राशि विभाग को नहीं मिल पा रही है। वन विभाग की ओर से ऐसे कारोबारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सूत्रों की मानेंम तो इस धंधे में जुटे ज्यादातर लोगों के पास कोई परमिट नहीं है और वे कम मूल्य पर ग्रामीणों से जड़ी बूटियां खरीदकर पड़ोसी राज्य पंजाब में भारी भरकम दामों पर बेच रहे हैं। इससे सरकार को लाखों का चूना लग रहा है। हिमाचल प्रदेश वन विभाग की नोटिफिकेशन के तहत कोड, पतीश, बरयां, बनक्शा, मुश्क बाला, कपडोल, गुच्छी और धूप वन संपदा में शामिल हैं। राष्ट्रीय बाजार में वाइल्ड ब्लैक मशरूम व मोरल मशरूम के नाम से जानी जाने वाली गुच्छी की थोक कीमत 12 हजार रुपए प्रति किलो है। जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 20 हजार रुपए प्रति किलो से ज्यादा है। विभाग की ढील के कारण सरकार को हर साल लाखाें का चूना लग रहा है। इस संदर्भ में वन विभाग के आरओ सुखदेव सिंह ने बताया कि इस साल चुवाड़ी में गुच्छी की खरीद फरोख्त के लिए कोई परमिट जारी नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि अवैध रूप से इसका कारोबार करते हुए कोई पकड़ा गया तो उसके खिलाफ उचित कार्यवाही की जाएगी।

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