
नाहन (सिरमौर)। पंचायत पल्होड़ी वासियों में राज्य सरकार के प्रति भारी रोष है। राज्य सरकार के निर्णय ने पंचायत पल्होड़ी को पिछड़ी पंचायत से बाहर रखने के आदेश दिए हैं। स्थानीय लोगों में इन आदेशों को लेकर भारी रोष है। पंचायत उप प्रधान बली मुहम्मद के नेतृत्व में ग्रामीणों ने सरकार की इस नोटिफिकेशन का विरोध किया है।
ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के 65 साल भी पंचायत पल्होड़ी सभी प्रकार की सुविधाओं से महरूम है। न पीने का पानी। न गांव के लिए पक्की सड़कें और न ही स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर कोई पहल की गई है। हर तरफ से यहां के लोग बेहद दयनीय जीवन जी रहे हैं।
ग्रामीणों ने राज्य सरकार से कहा कि किस आधार पर उन्हें पिछड़ी पंचायत की श्रेणी से हटाया गया? पल्होड़ी पंचायत की कुल 13 बस्तियों में से मात्र एक बस्ती को पीने के पानी की सुविधा मुहैया है। शेष 12 बस्तियां हमेशा पीने के पानी को तरसती हैं। उनकी पंचायत में 70 फसदी मुस्लिम गुज्जर तथा 15 फीसदी शेष जातियां हैं। हर साल बरसात में पंचायत जिला के अन्य हिस्सों से कट जाती है।
गरीबों के साथ किया अन्याय : डा. बिंदल
नाहन (सिरमौर)। राज्य सरकार के इस निर्णय पर पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एवं नाहन के विधायक डा. राजीव बिंदल ने हैरानी तथा दुख जताते हुए कहा कि यह दुर्भाग्य पूर्ण निर्णय है। बताया कि क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं का नामोनिशान नहीं है। शिक्षा तथा स्वास्थ्य से लेकर हर कदम पर ग्रामीण मुसीबतों का सामना कर रहे हैं। विधायक ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से अपील की कि वह पल्होड़ी पंचायत की हालत को देखते हुए अपने निर्णय पर तत्काल प्रभाव से दोबारा विचार करें।
