
शिमला। राज्य सरकार ने विधायक की कंस्ट्रक्शन कंपनी के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच का जिम्मा नगर निगम आयुक्त को सौंपकर रिपोर्ट तलब की है। चौपाल विधानसभा क्षेत्र के विधायक बलबीर वर्मा की कंपनी पर आरोप है कि दो पेड़ों को बिना अनुमति काटा गया है। नगर निगम भी अपने स्तर पर सोमवार से मौके पर जाकर जांच में जुट गया है। मंगलवार को दूसरे दिन भी मौके पर पेड़ों को पहुंचाए गए नुकसान के साक्ष्य खोजे गए।
वहीं, नगर निगम की वन शाखा ने मंगलवार को मौके की वीडियोग्राफी भी की है। छोटा शिमला से सटे ऐरा होम में करीब साढ़े चौदह बीघा भूमि पर एक दर्जन ब्लाक बनाए जा रहे हैं। यहां पर 85 फ्लैट निर्माणाधीन हैं। पुरुजीत सिंह इस भूमि के मालिक हैं। विधायक की कंपनी को निर्माण का काम सौंपा गया है। बीते रविवार रात को उपमहापौर को किसी ने मौके पर पेड़ काटने की सूचना दी, उसके बाद नगर निगम ने सोमवार सुबह से अपनी कार्रवाई शुरू की है। वन मंडलाधिकारी इंद्र कुमार ने सोमवार को कहा है कि वर्मा कंस्ट्रक्शन कंपनी के खिलाफ चालीस हजार की डैमेज रिपोर्ट काटी गई है। आगे की जांच अभी जारी है।
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विधायक कसूरवार पाए गए तो कानूनी कार्रवाई करें – मंत्री
शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने कहा कि नगर निगम शिमला को कहा गया है कि मामले की पूरी जांच की जाए। यदि इसमें विधायक कसूरवार पाए जाते हैं तो कानूनन कार्रवाई की जाए, क्योेंकि कानून सबके लिए बराबर है। फिर चाहे व्यक्ति एमएलए हो या मंत्री।
एफआईआर पर वन शाखा लेगी फैसला – आयुक्त
नगर निगम के आयुक्त अमरजीत सिंह ने बताया कि नगर निगम की अब तक की जांच में पता चला है कि भवन निर्माण के लिए दिए गए नक्शे में पेड़ नहीं दर्शाए गए थे। दो पेड़ काटने की सूचना भी मिली है। इसे वन विभाग देख रहा है। उन्होंने कहा कि इस मामले में एफआईआर दर्ज करनी है या नहीं, इस बारे में फैसला फारेस्ट डिपार्टमेंट को ही लेना है।
नियमों के तहत की जा रही है कंस्ट्रक्शन – बलबीर वर्मा
विधायक बलबीर वर्मा ने कहा कि जहां पेड़ काटे गए हैं वह उनकी कंस्ट्रक्शन साइट से सौ मीटर दूर हैं। इस जगह पर कुछ भवनों की कंपलीशन हो गई है। शहर में जहां जहां भी भवन निर्माण किए जा रहे हैं वहां नियमों के मुताबिक भवनों के नक्शे पास हुए हैं और नियमों के तहत ही भवन निर्माण किए जा रहे हैं। जहां मलबा फैंकने की बात नगर निगम कर रहा है वह प्लाट उनका अपना है। वहां से मलबा उठाया जा रहा है, मंगलवार को भी मलबा उठाने के लिए करीब डेढ़ सौ मजदूर लगाए गए थे।
