
शिमला। राजधानी में पेयजल और सीवरेज व्यवस्था को ठेके पर देने के खिलाफ लामबंद निगम कर्मचारियों ने 24 मई तक अपने विरोध प्रदर्शन को बंद कर दिया है। राष्ट्रपति के शिमला आगमन के चलते यह फैसला लिया गया है। अब 27 मई को निगम की संयुक्त कर्मचारी संघर्ष समिति निगम दफ्तर के बाहर गेट मीटिंग कर विरोध जताएगी। 29 मई को यूनियन आपात बैठक बुलाकर आंदोलन की रणनीति तैयार करेगी। 29 मई को ही कर्मचारी यूनियन द्वारा आयुक्त को दिए गए पंद्रह दिन के नोटिस की अवधि समाप्त हो रही है।
मंगलवार को नगर निगम की संयुक्त कर्मचारी संघर्ष समिति की बैठक अध्यक्ष ओमप्रकाश ठाकुर की अध्यक्षता में हुई। बैठक में राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए आउटसोर्सिंग के खिलाफ चलाए गए अभियान को स्थगित करने का फैसला लिया। समिति के महासचिव सुखदेव सिंह मट्टू ने बताया कि 27 मई को गेट मीटिंग कर निजीकरण का विरोध किया जाएगा। अगर निगम प्रशासन ने आउटसोर्सिंग को रद नहीं किया तो 29 मई को आपात बैठक बुलाकर आगामी रणनीति बनाई जाएगी। यूनियन नेता दिनेश चंद्र नौटियाल, आसाराम, मनोहर लाल अटवाल ने कहा कि निजीकरण को किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मुद्दे पर सभी कर्मचारी एकमत हैं।
