नियमों के मुताबिक हुई मुख्याध्यापकों की भरती

मंडी। सीधी भरती के माध्यम से नियुक्त मुख्याध्यापकों की बैठक जिला अध्यक्ष मनोज कुमार चौहान की अध्यक्षता में हुई। बैठक में मुख्याध्यापक संघ ने टीजीटी अध्यापकों की ओर से सीधी भरती को लेकर दिए जा रहे बयान का कड़ा विरोध किया।
बैठक में जिला मंडी के 28 मुख्याध्यापकों ने भाग लिया। मुख्याध्यापक संघ के जिला प्रधान मनोज कुमार चौहान ने कहा कि कुछ अध्यापक संघ के नेता अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए अनाप-शनाप बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीधी भरती का नियम वर्ष 1998 में बना। जब प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह थे। उनकी सोच थी कि शिक्षा विभाग में युवा वर्ग को पाठशाला प्रबंधन एवं प्रशासन का कार्य सौंपा जाए ताकि प्रदेश की पाठशालाओं का गुणात्मक विकास हो। वर्ष 1998 से 2012 तक सरकार पर संख्या बल का दबाव बना कर सीधी भरती को बार-बार रोका गया, जिससे कई वरिष्ठ योग्य अध्यापक न तो मुख्याध्यापक बन पाए और न ही प्रधानाचार्य। उन्हें अध्यापक पद से सेवानिवृत्त होना पड़ा। उच्च न्यायालय की सिंगल बैंच ने 25 प्रतिशत पद सीधी भरती से भरने का सरकार व शिक्षा विभाग को आदेश दिए, लेकिन विरोधी अध्यापक संघों ने मामले को डबल बैंच में चुनौती दी। डबल बैंच में भी नियमों के अनुसार मुख्याध्यापकों के 212 पद सीधी भरती से भरने के आदेश दिए गए। लोक सेवा आयोग के माध्यम से लिखित परीक्षा व साक्षात्कार कर चयन किया गया।
मुख्याध्यापकों का कहना है कि सीधी भरती के लिए लोक सेवा आयोग की ओर से जारी विज्ञप्ति में इस बात का कहीं जिक्र नहीं है कि अनुभव प्रमाण पत्र उपनिदेशक या उसके समकक्ष अधिकारी से प्रति हस्ताक्षित होना चाहिए। 179 में से 170 से ज्यादा मुख्याध्यापक सरकारी क्षेत्र से चयनित हैं और पाठशाला का मुखिया सर्विस बुक के हिसाब से अनुभव प्रमाण पत्र जारी करता है। मुख्याध्यापकों ने निर्णय किया कि टीजीटी संघ की ओर से किए जा रहे दुष्प्रचार के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जाएगी। बैठक में जिला महासचिव ओम प्रकाश, राज्य उप प्रधान डा. बलवंत सिंह, मुख्य सलाहकार नरेंद्र जम्बाल, सह सचिव सुभाष कमल, कोषाध्यक्ष संजय कुमार व रीना चांदला आदि मौजूद थे।

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