
चंबा। हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक कर्मचारी संघ और ग्रामीण बैंक अधिकारी आर्गेनाइजेशन ने रविवार को चंबा में बैठक का आयोजन किया। बैठक में आल इंडिया ग्रामीण बैंक आफिसर के राष्ट्रीय नेता डीसी शर्मा विशेष रूप से मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि पहली जुलाई से बैंक के कर्मचारी और अधिकारी काले बिल्ले लगाकर प्रदर्शन करेंगे। 15 जुलाई को मुख्यालय में धरना दिया जाएगा। इसके अलावा दो सितंबर से अनिश्चित कालीन अनशन शुरू कर दिया जाएगा। इतना होने के बावजूद प्रबंधन नहीं जागा तो 27 सितंबर को बैंक कर्मचारियों की ओर से हड़ताल रखी जाएगी। फिर भी मांगें नहीं मानी तो बैंक में अनिश्चितकालीन हड़ताल होगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में बैंक में अव्यवस्था चरम सीमा पर पहुंच गई है। बैंक की नई शाखाएं योजनाबद्ध तरीके से नहीं खोली जा रही हैं। इससे बैंक को लाखों रुपये का चूना लग रहा है। उन्होंने कहा कि बैंक में एनपीए बढ़कर 200 करोड़ तक पहुंच गया है, लेकिन बैंक प्रबंधन को इसकी कोई चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रबंधन की ओर से कैश कमाने के चक्कर में एनपीए को छुपाकर झूठा लाभ दिखाया जा रहा है। प्रबंधन निजी फायदे के लिए हर हथकंडे अपना रहा है, लेकिन कर्मचारियों की मांगें पूरी नहीं की जा रही और उनका शोषण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बैंक में कार्यरत सफाई कर्मचारी कई वर्षों से संदेशवाहक के घोषित पदों पर नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं। इसके लिए 358 दिन तक भूख हड़ताल भी क र चुके हैं, लेकिन बैंक प्रबंधन ने सभी वर्गों की पदोन्नति पर रोक लगा रखी है। इस कारण कुछ कर्मचारी प्रमोशन से पहलेे ही रिटायर हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रबंधन ने लिपिकों को मिलने वाली अतिरिक्त वेतन वृद्धियों को वापिस ले लिया है। देश भर के बैंकों में ये वेतनवृद्धियां हो रही है। उन्होंने कहा कि लिपिक की भर्ती प्रक्रिया भी अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। एकीकरण के बाद ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों और अधिकारियों के कई भत्तों पर प्रबंधन ने केंची चला दी है। संघ के महासचिव जीत और प्रकाश शर्मा ने कहा कि प्रबंधन की ओर से जानबूझ कर कर्मचारियों की मांगों को लटकाया जा रहा है। उन्हाेंने कहा कि प्रबंधन की ओर से शीघ्र उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो कर्मचारी आंदोलन क र देंगे। इसकी रूपरेखा तैयार कर ली गई है।
