शवों की भीड़ में अपनों की तलाश

कुल्लू। झीड़ी बस हादसे के बाद मातम में बदला कुल्लू अस्पताल का माहौल रात भर लोगों को रुलाता रहा। अपनों की तलाश में कोई अस्पताल पहुंचता और नजर के सामने पड़े शव को देखकर रो उठता। परिजनों की दर्दनाक चीखों से आसपास के लोग भी आंसू नहीं रोक पाते। कोई अपनी मां, तो कोई भाई और तो कोई पिता के खोने के गम में दहाड़े मारते हुए बदहवाश से अस्पताल का कौना-कौन छान मारते। कुल्लू अस्पताल में शायद ही पहले कभी इतनी भीड़ जमा हुई हो।
हजारों की तादाद में लोग अस्पताल परिसर में थे। कोई अपनी मां तो कोई भाई को तलाशता हुआ यहां पहुंचा था। आस थी तो सिर्फ इतनी की काश अपना घायल अवस्था में ही मिल जाए। लेकिन इनमें से कुछ एक ही ऐसे थे जिन्हें अपनों की आवाजें सुनने को मिली। अधिकतर लोगों को यहां पहुंचने पर शव ही दिखे।
आलम यह था कि अस्पताल में शवों को अंदर बाहर ले जाने के लिए स्ट्रेचर भी कम पड़ गए। देर रात तक एक्से रूम के पास शवों का ढेर लगा था। शवगृह 20 मरीजों से पैक था। अस्पताल प्रशासन ने शव अधिक होने पर कुछ शव रात को ही परिजनों को सौंप दिए। वहीं दूर-दराज क्षेत्रोें के लोगों को वीरवार को पोस्टमार्टम के बाद शव सौंपे गए। अस्पताल का स्टाफ और मरीजों के तीमारदार घायलों की मदद में रात भर डटे रहे।
आलम यह था कि शव को ढकने के लिए कफन की कमी पड़ गई। बाद में यहां वहां से इसका बंदोबस्त किया गया। सड़क हादसे का शिकार हुए अरमान, काजल, छाया और आराधना के परिजनों ने शव के इंतजार में रात अस्पताल के मुख्य गेट के बाहर आग के सहारे काटी। यह सब हरियाणा के कालका के रहने वाले थे। उधर एसएमओ डा. कमल कपूर ने कहा कि अस्पताल में विशेषज्ञ रातभर सेवा में डटे रहे।

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