कागजों में ही चल रहा हरोली का ब्लड बैंक

हरोली (ऊना)। जिला के हरोली में लगभग छह वर्ष पूर्व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ब्लड बैंक खोला गया था, लेकिन इसका डेढ़ लाख की आबादी वाले हरोली विस क्षेत्र को आज तक कोई लाभ नहीं मिल पाया है। क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर लगने वाले रक्तदान शिविरों के बाद ब्लड के भंडार को ऊना के क्षेत्रीय अस्पताल स्थित ब्लड बैंक भेजना विभाग की मजबूरी है। इसका कारण है कि न तो हरोली में खून को सुरक्षित रखने का कोई साधन है न ही यहां कोई कर्मचारी तैनात है जो इस पूरे काम को संभाल सके। कुल मिलाकर इस रक्तकोष का लाभ हरोली के एक भी बाशिंदे को नहीं मिल पाया है। हरोली का रक्तकोष मात्र कागजों में ही चल रहा है। वहीं, लोगों के इलाज के मामले में भी हरोली का पिछड़ापन कम नहीं है। पीएचसी में उपचार करवाने आए लोगों को प्राथमिक उपचार देने के बाद सीधे ऊना भेज दिया जाता है। स्थानीय लोगों में सतीश कुमार, राज कुमार, राकेश कुमार, प्रदीप कुमार, सचिन ठाकुर, राहुल, रेखा, सोमा देवी, आरके शर्मा, राजीव कुमार और पवन कुमार कहा कि हरोली में लोगों को लुभाने के लिए खोले गए ब्लड बैंक को जल्द ही व्यावहारिक रूप में लाया जाना चाहिए, जिससे जनता को इसका लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि पिछले छह वर्षों में यहां किसी को भी रक्त कोष का लाभ नहीं मिल पाया है। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी बात के लिए रोगियों को ऊना रेफर करने के बजाय हरोली में उपचार दिलाए जाने की सुविधा मुहैया करवाई जाए।
क्या कहना है विभाग का
खंड चिकित्सा अधिकारी डा. संजय मनकोटिया ने कहा कि स्टाफ के अभाव के कारण लोगों से दान स्वरूप लिए गए रक्त को ऊना भेजना पड़ता है। उन्होंने बताया कि हरोली में जल्द ही 50 बेड का सिविल अस्पताल बनने जा रहा है। इसके बाद न केवल लोगों को उपचार सुविधाएं यहां हासिल हो सकेंगी, बल्कि रक्तकोष का भी सुचारु संचालन आरंभ होगा।

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