हजारों लोगों की सेहत से दगा

ऊना। शीतल पेय पदार्थों की गुणवत्ता जांचे बिना मार्केट में सप्लाई किया जा रहा है। इनके इस्तेमाल से आपको फायदा होता है या नुकसान, इससे मुनाफाखोरों को कोई लेना-देना नहीं है। जिला में अक्सर लोग भयंकर गर्मी से राहत पाने के लिए इन शीतल पेय पदार्थों का इस्तेमाल करते हैं। मगर वे नहीं जानते कि पलभर के लिए ठंडक पहुंचाने वाले ये पदार्थ उनकी सेहत पर प्रहार कर रहे हैं। इसका ताजातरीन उदाहरण समूर कलां में एक दुकानदार को सप्लाई में भेजी गई शीतल पेय की बोतल से मिलता है। जिसमें बड़ी मात्रा में कचरा भरा हुआ है। ऐसे शीतल पेय लोगों की सेहत के लिए बेहद हानिकारक हो सकते हैं। फिर भी कंपनियां इस ओर ध्यान देना उचित नहीं समझती हैं। न ही उन्हें प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग का कोई खौफ है।
समूरकलां के एक कारोबारी ने बताया कि उन्हें शीतल पेय की बोतल में कचरा भरा हुआ मिला। जिसके चलते उन्होंने कंपनी के प्रतिनिधियों को इस मामले से अवगत करवाने का प्रयास किया। लेकिन, उन्हाेंने इसे रूटीन का काम कहकर पल्ला झाड़ लिया। स्थानीय बुद्धिजीवियों में आरएन पाठक, ओपी शांत, राज कुमार शर्मा, बनवारी लाल पाठक, चित्त विलास पाठक, पूर्व शिक्षक हेमराज लखनपाल, तरसेम शर्मा और बीसी शर्मा का कहना है कि इस प्रकार के शीतल पेय सेहत के लिए बेहद हानिकारक होते हैं। उनका तर्क है कि ऐसे पेय पदार्थों में रसायनों और गैसों का भरपूर प्रयोग किया जाता है, जो कई लोगों के लिए स्वास्थ्य की दृष्टि से नुकसानदेह होते हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से भी इस मामले में कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

कंपनी से मांगेंगे जवाब : धीमान
उधर, जिले के फूड सेफ्टी अधिकारी जगदीश धीमान का कहना है कि समूरकलां में शीतल पेय की बोतल में कचरे की जानकारी मिल गई है। कंपनी से मामले पर जवाब तलबी की जाएगी। लोगों की सेहत से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

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