
बंगाणा (ऊना)। बंगाणा क्षेत्र की 40 ग्राम पंचायतों के हजारों बाशिंदे इस समय आग के ढेर पर बैठे हैं। कुटलैहड़ क्षेत्र के जंगलों में हर साल आग से करोड़ों की वन संपदाओं सहित लोगों की संपत्तियां तक राख हो चुकी हैं, लेकिन लोगों को आग से बचाने के मामले में सरकारें मौन हैं। प्रशासन भी इस मसले पर कुछ कहने को तैयार नहीं है। ऊना से 30 से 40 किलोमीटर की दूरी पर बसे कुटलैहड़ के गांवों में किसी भी आग की घटना के दौरान दमकल विभाग को बुलाया जाता है तो उसके पहुंचने से पूर्व सब कुछ राख हो चुका होता है। ऐसी ही कई घटनाओं के बाद बंगाणा उपमंडल में अग्निशमन केंद्र खोलने को लेकर किसी ने भी कोई प्रयास नहीं किया है।
कुटलैहड़ क्षेत्र में फायर स्टेशन न होने की वजह से इलाके के वन, रिहायशी मकान और दुकानें सब कुछ असुरक्षित हैं। इसके साथ ही असुरक्षित है हजारों लोगों की जान। हर वर्ष गर्मियों का सीजन आते ही क्षेत्र में आग की घटनाएं शुरू हो जाती हैं। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों में प्रधान शिवनाथ शर्मा बुधान, प्रधान महेंद्र सिंह लठियाणी, प्रधान गुरदेव सूरज तनोह, प्रधान तृप्ता देवी मलांगड़, प्रधान उर्मिला देवी धुंदला, प्रधान कुलदीप शर्मा डोहगी, प्रधान चंद्र कुमार मुच्छाली, प्रधान रमेश चंद शर्मा धनेत, उपप्रधान किशोरी लाल शर्मा, उपप्रधान देवराज शर्मा, उपप्रधान निर्मल कौशल, उपप्रधान मेहर चंद सुखिया सहित बंगाणा ब्लाक की पंचायतों, महिला मंडलों एवं नेहरू युवक मंडलों के प्रतिनिधियों का कहना है कि यहां अग्निशमन केंद्र न होने के चलते क्षेत्रवासियों को आग से निपटने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। क्षेत्रवासियों ने संबंधित विभाग और प्रदेश सरकार से उपमंडल बंगाणा में अग्निशमन केंद्र खोलने की मांग की है। उधर, एसडीएम बंगाणा केएस चौधरी ने बताया कि उपायुक्त कार्यालय से बंगाणा में फायर स्टेशन खोलने के लिए जगह उपलब्ध करवाने को पत्र आया है। फायर स्टेशन के लिए बंगाणा के नजदीक ही जगह का चयन हो चुका है। जल्द ही इसकी रिपोर्ट जिला उपायुक्त को भेज दी जाएगी।
