कैसे झेलेंगी हमारी इमारतें भूकंप के झटके?

शिमला। मंगलवार को राजधानी में आए भूकंप के झटकों से शहरवासी सहमे हुए हैं। भगवान न करे पर ये सच है कि शहर की इमारतें भूकंप के झटकों को सहने में सक्षम नहीं हैं। शहर के अधिकांश क्षेत्रों में तय मानकों को धता कर भवन निर्माण किया गया है। समिट्री और कच्चीघाटी क्षेत्र में मकान सत्तर डिग्री ढलान पर बने हैं। 35 डिग्री से अधिक ढलान पर बनाए गए मकानों को भूकंप की दृष्टि से अधिक संवेदनशील माना जाता है। भूकंप आने पर यह मकान कहर बरपा सकते हैं। इन भवनों के जमींदोज होने का खतरा भी अधिक है। शहर को सुव्यवस्थित ढंग से बसाने के लिए बनाए गए सिटी डेवलेपमेंट प्लान के लिए टीसीपी विभाग द्वारा किए गए सर्वे में भी इसका खुलासा हुआ है।
राजधानी के कच्चीघाटी में 85 फीसदी मकान 75 डिग्री स्लोप पर खड़े कर दिए गए हैं। समिट्री क्षेत्र में सत्तर डिग्री ढलान पर 80 फीसदी मकान बनाए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार 35 से चालीस डिग्री से अधिक ढलान पर मकान बनाना भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा की दृष्टि से खतरनाक हैं। उधर, समिट्री और कच्चीघाटी क्षेत्र सघन जनसंख्या वाले क्षेत्र हैं। भूकंप आने की स्थिति में इन क्षेत्रों में जानमाल का अधिक नुकसान हो सकता है। इन क्षेत्रों में बने घरों में सट बैक भी नदारद है। शहर के न्यू शिमला, विकासनगर, खलीनी, छोटा शिमला, कैथू, भराड़ी को छोड़कर लगभग सभी क्षेत्रों में मकान पचास डिग्री से अधिक ढलान पर बनाए गए हैं।
सिटी डेवलेपमेंट प्लान के लिए टीसीपी विभाग द्वारा किए गए सर्वे के सेक्शन 5.6.3 में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक ढलान पर बनाए गए घरों में सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्र ढली और समिट्री में हैं। इसके बाद संजौली को संवेदनशील बताया गया है। समिट्री, ढली और कच्चीघाटी में छह मंजिलों तक भवन बनाए गए हैं। टीसीपी ने उल्लेख किया है कि भूकंप के समय इन क्षेत्रों में कहर बरप सकता है।

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