
बिलासपुर। प्रसिद्ध गोबिंद सागर का पानी स्वच्छ है या नहीं। इस बारे कुछ नहीं कहा जा सकता। बिलासपुर शहर अभी तक सीवरेज से नहीं जुड़ पाया है। सीवरेज प्लांट नहीं बनने के कारण शहर की गंदगी गोविंद सागर में जा रही है। शहर के मध्य से बहने वाले नाले में भी गंदगी का साम्राज्य बना हुआ है। गर्मियों में इससे और दिक्कतें बढ़ सकती है। शहर में सीवरेज के लिए करोड़ों का बजट स्वीकृत हुए हैं, लेकन अभी तक इसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। बजट नहीं मिलने से कार्य आगे नहीं बढ़ पाया है।
बिलासपुर शहर में सीवरेज व्यवस्था पुराने ढर्रे पर चल रही है। सेफ्टिक टैंक प्रणाली के तहत ही यहां गंदगी को ठिकाने लगाया जा रहा है। इस वजह से कई बार भूमिगत होते हुए सीवरेज का यह पानी पेयजल स्रोतों में मिलने का भय रहता है। इससे गर्मियों में डायरिया, आंत्रशोथ जैसी बीमारियों के फैलने का खतरा बना रहता है। बावजूद इसे सरकार कोई कदम नहीं उठा रही। शहर के लिए सीवरेज योजना वर्षों पहले मंजूर हुई है। अभी तक इसका कार्य तक आरंभ नहीं हो पाया। इसके लिए बजट जारी नहीं होना कारण माना जा रहा है। योजना के तहत शहर में दो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाने हैं। इसके लिए भूमि का चयन भी कर लिया है, किंतु इलाकावासी भूमि को लेकर भी विरोध कर रहे हैं। इससे आईपीएच महकमे को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उधर, यहां तैनात आईपीएच के अधिशासी अभियंता पीसी शर्मा ने बताया कि योजना मंजूर हो गई है। बजट आते ही कार्य आरंभ किया जाएगा। भूमि चिन्हित की गई है। इसके हस्तांतरण की प्रक्रिया जारी है।
