79 साल बाद कार्बेट पर लग्जरी टैक्स

रामनगर। स्थापना के 79 वर्ष बाद देश के अग्रणी कार्बेट नेशनल पार्क को पहली बार अपनी कामर्शियल आय का पूरा ब्यौरा वाणिज्य कर विभाग को देना होगा। वाणिज्य विभाग ने 2013 से कार्बेट को लग्जरी टैक्स (सुख साधन कर) के दायरे में ले लिया है। कार्बेट की ज्यादातर आय रिसोर्ट से होती है और देश के कई हिस्सों प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक यहां घूमने के लिए आते हैं। अब तक आय को अपने तक सीमित रखने वाले कार्बेट पार्क प्रशासन के लिए यह नया फरमान शुरूआत में बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है।
कार्बेट नेशनल पार्क की स्थापना 1934 में हुई थी। इसका जितना विस्तार हुआ, आय भी उसी तेजी से बढ़ी है। लेकिन इस आय का कोई लेखाजोखा कार्बेट के बाहर सार्वजनिक नहीं होता। पूर्व में लग्जरी टैक्स का कामकाज पर्यटन विभाग के पास था, लेकिन 2009 में यह कार्य वाणिज्य कर विभाग में मर्ज कर दिया गया। तभी से पार्क पर टैक्स लगाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। ठीक दो साल बाद कुमांऊ के एडीशनल कमिश्नर एनसी शर्मा, संयुक्त कमिश्नर एमएस ग्वाल के निर्देश पर रामनगर के सहायक आयुक्त विनय प्रकाश ओझा ने टैक्स के दायरे में लाने की प्रक्रिया शुरू की और इस साल इसे लागू कर दिया गया।
सहायक आयुक्त ने बताया कि राजस्व हित को देखते हुए 1000 हजार से लेकर 3500 रुपये प्रति कमरे के किराए पर पांच प्रतिशत, 3500 से अधिक के किराए पर 10 प्रतिशत की दर से प्रति दिन कर लगाया गया है। सालभर का हिसाब-किताब कार्बेट पार्क प्रशासन को प्रस्तुत करना होगा। पार्क उपनिदेशक डा. साकेत बडोला ने बताया कि पार्क में एक हजार रुपये से ऊपर किराए वाले 66 कमरे हैं। खिनानौली में तीन कमरे पांच हजार रुपये किराए वाले है। जबकि पुराना वनविश्राम गृह ढिकाला के दो कमरों का किराया तीन हजार रुपये है। सर्पदुली, पुराना वनविश्राम गृह ढिकाला और गैरल ओल्ड एफआरएच में दो हजार रुपये किराए का कमरा है। बाकी कमरों का 1250 रुपये लिया जाता है।
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वाणिज्य कर विभाग में है टाइगर कंजरवेशन फाउंडेशन के नाम दर्ज
रामनगर। कार्बेट नेशनल पार्क ने वाणिज्य कर विभाग में सदस्य सचिव टाइगर कंजरवेशन फाउंडेशन फॉर सीटीआर फारेस्ट कंपाउण्ड रानीखेत रोड रामनगर के नाम से पंजीकरण कराया है। विभाग की तरफ से फाउंडेशन को 05-एलटी-6602056 पंजीकरण संख्या आवंटित की गई है। -विनय प्रकाश ओझा, सहायक आयुक्त वाणिज्य कर विभाग।

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