
मैहतपुर (ऊना)। ऊना जिले में बिना निशानदेही के बनाई गई संपर्क सड़कों में जिन किसानों की निजी जमीन गई है, उनको आज तक सरकार ने फूटी कौड़ी तक का मुआवजा नहीं दिया है। पिछले तकरीबन 44 साल से मुआवजे का इंतजार करते इन किसानों के आंखें पथरा गई हैं। अब किसानों ने प्रदेश के राजस्व मंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री को पत्र लिखकर संपर्क सड़कों में कई अपनी निजी जमीन का मुआवजा मांगा है। सूबे के दो अहम महकमों के वजीरों को लिखे पत्र में किशनदेव पुत्र रामदास निवासी रायपुर सहोड़ां ने कहा है कि 1970-71 के दौरान बनगढ़-नंगड़ा संपर्क बनाई गई थी। इसमें उनकी करीब 22 कनाल निजी जमीन लोक निर्माण विभाग ने इस सड़क में दबा ली। इसी प्रकार गांव के कई अन्य किसानों की जमीन पर विभाग ने सड़क बनाई है, लेकिन मुआवजे के तौर पर कुछ नहीं दिया, जबकि बिना निशानदेही के बनी मैहतपुर-संतोषगढ़ संपर्क सड़क का मुआवजा लोगों को दिया गया था। शिकायत पत्र में किशनदेव ने लिखा है कि अब उसी संपर्क सड़क को चौड़ा किया जा रहा है, और लोक निर्माण विभाग सड़क के दोनों ओर से जमीन ले रहा है। बिना निशानदेही के लोगों की जमीन दबाई जा रही है। उधर, गांव में 15 साल तक प्रधान रहे रोशन लाल सहोड़ की मानें तो रायपुर ऊपरला तथा झिगला की सरहद तक बने लिंक रोड बिना निशानदेही के बनाए गए हैं, जिससे लोगों के आपसी जमीनी विवाद भी बढ़ गए हैं। उन्होंने कहा कि जब मैहतपुर-संतोषगढ़ लिंक रोड का सरकार ने मुआवजा दिया था तो बनगढ़-नंगड़ा लिंक रोड का क्यों नहीं?
क्या कहते हैं जिला राजस्व अधिकारी
जिला राजस्व अधिकारी विशाल शर्मा ने कहा कि उनके ध्यान में यह मामला नहीं लाया गया है। हालांकि उन्होंने कहा कि लिंक रोड बनाते वक्त निशानदेही लेना लोक निर्माण विभाग का काम है।
क्या कहता है लोक निर्माण विभाग
उधर, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जीएस राणा ने कहा कि लिंक रोड को चौड़ा करने के लिए निशानदेही की जरूरत नहीं होती। अगर निशानदेही से सड़कें बनेंगी तो कई तरह की दिक्कतें खड़ी होंगी। सरकार की नई पॉलिसी के तहत सड़क में गई जमीन का मुआवजा नहीं दिया जाएगा क्याेंकि सरकार उन्हें सड़क सुविधा जो मुहैया करवा रही है।
