
चंबा। जिला में वन अधिकार समितियों के गठन के लिए बुलाई गई विशेष ग्राम सभाएं बुरी तरह फ्लाप रहीं। इस मर्तबा भी ग्राम सभा की राह में कोरम रोड़ा बन गया। जिला की 283 पंचायतों में से अधिकतर पंचायतों में ग्रामीणों ने मिनी संसद में आने के लिए रुचि नहीं दिखाई। जिला पंचायती राज विभाग के पास पहुंची सूची के अनुसार 283 पंचायतों में से 37 पंचायतों में ही ग्राम सभा का कोरम पूरा होने की सूचना है। यानी जिला की 246 पंचायतों में कोरम बाधा बन गया। हैरत की बात यह है कि वन अधिकार समितियों के गठन के लिए बुलाई गई विशेष ग्राम सभाओं में मात्र पांच ही वन अधिकार समितियों का गठन होने का समाचार है। बताया जा रहा है कि सिल्लाघ्राट, हिमगिरी, ब्याणा, खज्जियार, एक तीसा ब्लॉक व एक भरमौर ब्लॉक की पंचायत में वन अधिकार समिति के गठन की सूचना है। विकास खंड चंबा की 39 पंचायतों में से दो, सलूणी की 46 पंचायतों में से 15, तीसा की 42 में से एक, भटियात की 69 में से चार, मैहला की 42 पंचायतों में से तीन पंचायतों में ही कोरम पूरा हुआ है। विकास खंड पांगी में ग्राम सभा के आयोजन की कोई रिपोर्ट विभाग के पास नहीं पहुंची है। खंड विकास अधिकारी चंबा मोहन शर्मा और एसडीएम चंबा बचन सिंह ने बताया कि पंचायती राज अधिनियम के तहत 15 दिनों के बाद पंचायतें ग्राम सभा का आयोजन कर सकती हैं।
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क्यों नहीं बन पाई कमेटियां :
वन अधिकार समितियों के गठन के लिए सबसे बड़ा कारण 50 प्रतिशत ग्राम सभा सदस्यों की भागीदारी को माना जा रहा है। वन अधिकार समितियों के गठन के लिए गाइडलाइन में बैठक का 50 प्रतिशत कोरम पूरा होने के साथ 30 प्रतिशत महिलाओं व अनुसूचित जाति के लोगों की भागीदारी होना आवश्यक था। विशेष ग्राम सभा में 50 फीसदी सदस्य नहीं पहुंच पाए और समितियों का गठन अधर में लटक गया। पंचायत स्तर की इन कमेटियों में एक अध्यक्ष, सचिव के साथ 10 से 15 के बीच में सदस्य चुने जाने थे।
