222 देवी-देवताओं के मंदिरों में सूनापन

कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव की शोभा बढ़ाने के लिए जिला भर से आए 222 देवी-देवता अपने मूल देवालयों को छोड़कर ढालपुर स्थित अपने अस्थायी शिविरों में पहुंच गए हैं। देवताओं के दशहरा प्रवास के चलते गांवों में स्थित उनके मंदिर सूने पड़ गए हैं। आने वाले 15 दिन के लिए जिला के ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप भी खामोश हो गई है। खास यह रहता है कि इस दौरान ग्रामीण इलाकों में देवताओ के सम्मान में न तो कोई मेला होगा और न ही धार्मिक आयोजन।
डेढ़ से दो सप्ताह तक जिला के आनी, निरमंड, बंजार, गड़सा, सैंज, लगवैली, खराहल, मणिकर्ण तथा ऊझी घाटी के देवालयों में देवताओं के प्रतीक चिह्नों की अब शंख ध्वनि से पूजा होगी। ग्रामीणों क्षेत्रों की महिलाएं इस दौरान न तो अपने कुलज देवता की पूजा अर्चना कर सकेंगी और न ही दर्शन। जिला देवी देवता कारदार संघ के महासचिव टीसी महंत का कहना है कि लोगों में देवताओं के प्रति गहरी आस्था है। हर देवी-देवता के सम्मान में किसी न किसी स्वरूप में मेले और त्योहारों का आयोजन किया जाता है लेकिन दशहरा पर्व में देवी-देवताओं की अहम भागेदारी के चलते 10 से 15 दिन तक कोई भी धार्मिक कार्यक्रम आयोजित नहीं हो सकेंगे। ग्रामीणों में इन दिनों अपने-अपने आराध्य व कुलज देवी देवता की मंदिर वापसी का बेसब्री से इंतजार रहता है।

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