
कुल्लू। भारत की आजादी के प्रथम शहीद मंगल पांडे को फांसी के कुछ दिन बाद धर्मशाला के पुलिस मैदान में अंग्रेज सरकार ने हिमाचल के युवराज प्रताप सिंह को भी फांसी पर लटकाया था। भले ही उनका नाम आज कोई भी नहीं जानता हो लेकिन अब इस इतिहास को खोज निकाला है।
कुल्लू की ब्राह्मण कल्याण सभा ने शनिवार को युवराज प्रताप सिंह का शहीदी दिवस मनाया है। इस मौके पर सभा के पदाधिकारियों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस मौके पर बतौर मुख्यातिथि पहुंचे युवराज प्रताप सिंह के वंशज रिपु दमन तथा उनकी पत्नी ललिता ने शिरकत की। मुख्य अतिथि ने बदाह में युवराज के स्मारक निर्माण के लिए भूमि दान करने की घोषणा भी की। कहा कि इससे आने वाली पीढ़ि को 1859 के हिमाचल के पहले शहीद की जानकारी मिलेगी। ललिता कंवर ने कहा कि ब्राह्मण जनकल्याण सभा का यह सराहनीय प्रयास है। सभा के अध्यक्ष खेम राज शर्मा ने कहा कि सभा लंबे समय से युवराज के इस इतिहास को खंगाल रही थी। उन्होंने स्मारक बनाने के लिए दान की भूमि के लिए आभार जताया है। सभा के संस्थापक सदस्य मनमोहन गौतम ने कहा कि आने वाले समय में इस तरह के शहीदों के इतिहास को भी सभा खोजेगी। वरिष्ठ साहित्यकार जयदेव विद्रोही ने कहा कि 15 अगस्त के दिन जहां पूरा देश आजादी की कुर्बानी को याद करेगा वहीं ब्राह्मण जन कल्याण सभा 1859 के शहीद को श्रद्धांजलि के रूप में उनका स्मारक बनाने की प्रक्रिया शुरू करेगी। इस मौके पर सभा के सदस्य प्रदीप कुमार, लवली शर्मा, पवन कुमार, पंडित शंभू लाल, पंडित पना लाल, दौलत राम आचार्य, कृष्णा शर्मा और अंजू शर्मा सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
