
शिमला। हिमाचल प्रदेश अनुबंध कर्मचारी कल्याण महासंघ भी नियमित कर्मचारियों की तर्ज पर आपस में मान्यता के लिए आमने सामने होते दिख रहे हैं। रविवार को शिमला में अनुबंध कर्मचारियों के एक धड़े ने बैठक कर साझा मोर्चा बनाने का फैसला लिया। इसमें कल्याण महासंघ के पदाधिकारियों ने हिस्सा नहीं लिया। शिमला में मौजूद अनुबंध कर्मचारी नेताओं ने दावा किया कि महासंघ के अध्यक्ष पवन सैनी को भी बुलाया था, लेकिन वह इसमें हिस्सा नहीं ले सके। वहीं पवन सैनी ने किसी भी तरह की बैठक या न्योते से इनकार किया है। प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों, निगमों, बोर्डों में तीस हजार से ज्यादा अनुबंध कर्मचारी सेवारत हैं।
रविवार को हुई बैठक में कॉलेज लेक्चरर शिक्षक एसोसिएशन, स्कूल टीचर वेल्फेयर एसोसिएशन, बागवानी विभाग, सिविल सप्लाई, तकनीकी शिक्षा विभाग, विश्वविद्यालय के अनुबंध कर्मचारी, बिजली बोर्ड के अनुबंध कर्मचारी और लिपिक वर्ग के अनुबंध कर्मचारी नेताओं ने हिस्सा लिया। कॉलेज लेक्चरर एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. हर्ष वर्धन खिमटा ने दावा किया कि 14 हजार अनुबंध शिक्षकों सहित अन्य विभागों में तैनात अनुबंध कर्मचारियों ने साझा मोर्चा बनाने का फैसला लिया है। इसमें सभी अनुबंध कर्मचारियों को एक मंच पर लाकर एसोसिएशन बनाने, दिसंबर तक मुख्यमंत्री को सम्मानित कर कार्यक्रम करने, अनुबंध कर्मचारियों को तीन साल में रेगुलर करने की मांग उठाने, संशोधित वेतन देने, गैर आर्थिक यानी छुट्टियों का लाभ शीघ्र देने से लेकर अन्य मांगों को सरकार के समक्ष उठाने का फैसला लिया। बैठक में बलवंत सदरेट, पवन शर्मा, सुंदर भगत नेगी, नारायण चंद रांटा, राहुल चौधरी, राजेश पाठक, डा. सुनील ठाकुर, राकेश ठाकुर, राम कृष्ण और विनोद कुमार सहित अन्य अनुबंध कर्मचारी नेता शामिल थे।
