
भल्याणी (कुल्लू)। कुल्लू घाटी के नदी-नालों का पानी जमने लग गया है। लंबे अरसे से जिला में बारिश नहीं होने से घाटी के छोटे-बडे़ नदी-नालों में पानी का जलस्तर सिमट कर रह गया है। ऐसे में जिले में विद्युत उत्पादन करे रहे हाईडल प्रोजेक्ट बैकफुट पर आ खड़े हुए हैं। उत्पादन में इतनी गिरावट दर्ज की गई है कि प्रोजेक्टों का आर्थिक संतुलन गड़बड़ा गया है। घाटी के ऊंचाई वाले इलाकों में अत्यधिक ठंड के चलते नदी-नाले जाम हो गए हैं। ऐसे में जलस्तर घट गया है तथा बिजली उत्पादन कर रहे हाईडल प्रोजेक्टाें में बिजली उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। इसकी पुष्टि डीएसएल प्रोजेक्ट के जीएम श्याम ठाकुर तथा उसाका हाईडल प्रोजेक्ट के प्रशासनिक अधिकारी राजेश वर्मा ने की है। डीएसएल जो 4.5 मेगावाट का उत्पादन करता है, आज यह महज 1.2 मेगावाट बिजली उत्पादन कर रहा है। जबकि, उसाका हाईडल प्रोजेक्ट 5.2 मेगावाट का प्रोजेक्ट होने पर यहां वर्तमान में उत्पादन 0.9 का हो रहा है। ब्रह्मगंगा विद्युत प्रोजेक्ट के मालिक घनश्याम सूद ने बताया कि उनके पांच मेगावाट के प्रोजेक्ट में आज महज 1.25 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। इसी तर्ज पर हाईडल प्रोजेक्ट चकसी 2 मेगावाट के प्रोजेक्ट में केवल 400 किलोवाट उत्पादन हो रहा है। साईं इंजीनियरिंग के महाप्रबंधक प्रेम चंद पराशर ने कहा कि उनके बरशैणी स्थित दस मेगावाट प्रोजेक्ट में उत्पादन सिकुड़ कर मात्र चार मेगावाट हो रहा है। ऐेसे में जिला के हाईडल प्र्रोजेक्टों की आर्थिक स्थिति बिगड़ कर रह गई है। आर्थिक संतुलन बिगड़ने के चलते कई प्रोेजेक्टों में अपने कर्मचारियों को वेतन भुगतान के लाले भी पड़ गए हैं
