
आनी (कुल्लू)। कुल्लू बस हादसे में काल का ग्रास बने आउटर सिराज के ग्यारह लोगों में चार एक ही परिवार से थे। निरमंड के अरसू के रहने वाले जीवानंद पाठक, उनकी पत्नी बलासु देवी और उनकी दो जवान बेटियों की हादसे में मौत हो गई।
हादसे के बाद जहां पूरा अरसू क्षेत्र शोकाकुल है, वहीं जीवानंद और उनकी पत्नी के सजाए अरमान खत्म हो गए। दंपति ने अपनी बेटियों की धूमधाम से शादी करने के जो सपने देखे थे, वे भी खत्म हो गए। हादसे के दिन जीवानंद अपने परिवार के साथ जिला स्तरीय आनी मेला देखने आ रहे थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि रास्ते में मौत उनका इंतजार कर रही है। घर में बचीं दो विवाहित बेटियों का हादसे के बाद रो-रो कर बुरा हाल है। बताते हैं कि उनके पिता शिमला में पढ़ाई कर रहीं अपनी दोनों बेटियों के हाथों में जल्द मेहंदी देखना चाहते थे। वहीं वे अपनी होनहार बेटियों को ऊंची पदवी पर भी देखना चाहते थे। लेकिन किस्मत का खेल देखिए, इस सपने को साकार करने के लिए न तो जीवानंद और उनकी पत्नी बचे, बल्कि जिनके हाथों में मेहंदी देखना चाहते थे, वे भी नहीं बचीं। आज पूरा अरसू क्षेत्र शोक में है। एक ही परिवार की चार चिताएं एक साथ जल उठीं। वीरवार को सुबह चार लाशें जब गांव में पहुंचीं तो एकाएक लोगों की आंखें ऐसे नम हुईं कि सभी अपना होश खो बैठे। शायद किसी ने सोचा न था कि ऐसा भी जिंदगी में वक्त आएगा। गांव में एक साथ जलीं चार चिताओं को जीवानंद के भतीजे ने मुखाग्नि दी।
