हरी घास में सिमटकर आया आदर भाव

कुल्लू। सदियों पहले बने रिवाजों का कुल्लू घाटी में आज भी बखूबी निर्वहन होता है। भले ही आज बुजुर्गों के प्रति आदर भाव जगाने के लिए तरह-तरह के कार्यक्रम हो रहे हों लेकिन बुजुर्ग पहले ही इस रिवायत को बना गए थे। सोमवार को सायर संक्रांति पर इसकी झलक बखूबी देखने को मिली।
लोगों ने सुबह पौ फटते ही स्नान कर अपने आराध्य देवता की पूजा की और इसके बाद हरी दूूब देकर बड़ों का आशीर्वाद पाया। इस पवित्र माह के शुभ अवसर पर जिले के कई इलाकों में कारकूनों ने देव रथों को दर्शनार्थ हेतु देवालय से बाहर भी निकाला। आराध्य देवता के दर्शन के लिए दिन भर लोगों का तांता लगा रहा। शायर माह के आरंभ होने से जिले में अब शायर मेलों की पूरे महीने धूम रहेगी।
बंजार के रोपा गांव में देवता बंगलेश्वर को समर्पित रोपा सायरी मेला भी सोमवार से शुरू हो गया। मेले में सैंज घाटी के कनौन गांव के देवता बनशीरा भी भाग लेंगे। तीन दिन तक चलने वाले इस शायर मेले में कुल्लवी नाटी भी डलेगी। देवता बंनशीरा के कारदार प्रेम सिंह ने कहा कि देवता बंगलेश्वर से मिले निमंत्रण पर देवता शायर मेले में भाग ले रहे हैं।

Related posts