हमने ऐसे भारत की कल्पना नहीं की थी: सत्यमित्र

मैहतपुर (ऊना)। हमने ऐसे भारत की कल्पना कतई नहीं है, जिसमें भ्रष्टाचार चरमसीमा पर हो, अशिक्षा और अज्ञानता का अंधकार आज भी दूर नहीं हो पाया हो, भूख गरीबी से देश की जनता त्रस्त हो, और बेरोजगारी से युवा पीढ़ी जूझ रही हो, ऐसे स्वतंत्रता के क्या अर्थ हैं? आजादी के परवाने बयोबृद्व स्वतंत्रता सेनानी के दिल का यह दर्द आजादी की सालगिरह पर आयोजित ध्वजारोहण के अवसर पर उनकी जुबां पर आ गया। स्थानीय औद्योगिक क्षेत्र में स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानी सत्यमित्र बक्शी आर्य ने ध्वजारोहण किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भले हमारा मुल्क 15 अगस्त 1947 में अंग्रेजों की गुलामी मुक्त हो गया, लेकिन अशिक्षा, गरीबी, अज्ञानता, भ्रष्टाचार से जब तक आजादी नहीं मिलती, तब तक इस राजनीतिक आजादी के हमारे लिए कोई मायने नहीं हैं। बक्शी ने कहा कि आज देश की जो परिस्थितियां बन चुकी हैं, उसपर ज्यादा कुछ कहना शायद सही नहीं होगा, क्योंकि देश का बच्चा बच्चा अनेक समस्याओं से परेशान है। इस मौके पर मैहतपुर उद्योग संघ के अध्यक्ष बलतेजइंद्र सिंह, उपाध्यक्ष सुरेन्द्र उप्पल, वेदप्रकाश ऐरी, महासचिव वीरेश कश्यप, सहसचिव मंजीत सिंह नामधारी, कोषाध्यक्ष शम्मी जैन, वार्ड पाषर्द केपी चौधरी, सुशील गोयल, पूर्व अध्यक्ष सीआर कौशल, विनोद लखनपाल, वरुण अग्रवाल, अश्वनी जैन, कृष्ण मोहन पांडे, समेत कई अन्य लोग मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन:- मैहतपुर में ध्वजारोहण करते स्वतंत्रता सेनानी सत्यमित्र बक्शी व अन्य लोग।

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