हजारों लोगों को बिना फिल्टर का पानी

भल्याणी (कुल्लू)। घाटी के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग आज भी मटमैला पानी पीने को मजबूर हैं। विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में फिल्टर टैंक नहीं बनवाए हैं। इस कारण ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार नलकों से कीड़े और मेंढक तक निकल आते हैं। इसका असर लोगों की सेहत पर भी पड़ता है। बरसात में विभाग की पेयजल आपूर्ति की स्थिति और चिंताजनक हो जाती है।
अशुद्ध पानी पीने के चलते हर साल घाटी में दर्जनों लोगों की मौतें आंत्रशोथ की चपेट में आने से होती है। घाटी के बुद्धिजीवियों ने नेताओं तथा विभाग के आला प्रबंधन को सलाह दी है कि वह पश्चिमी सभ्यता और संस्कृति की नकल करने के बजाए वहां के विकास कार्योें की नकल करें। विकसित देशों की तर्ज पर घाटी के ग्रामीण क्षेत्रों में फिल्टर टैंक स्थापित कर लोगों को स्वच्छ पेयजल आपूर्ति मुहैया करवाएं।
कुल्लू घाटी के ग्रामीण क्षेत्रों को अधिकांश नदी-नालों के तट पर बनी योजनाओं से पानी की आपूर्ति की जाती है। जिले के 95 फीसदी गांवों में आज भी आईपीएच महकमा फिल्टर टैंक स्थापित नहीं कर पाया है। ऐसे में गांवों के लोगों को मजबूरन मटमैला पानी पीना पड़ता है। कई बार तो महकमे द्वारा स्थापित सार्वजनिक नलकों में कीड़े तथा मेंढक तक टपक आते हैं।
घाटी में हर साल अशुद्ध पानी पीने से दर्जनों लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है। भुट्टी निवासी गुरदयाल सिंह, बड़ाग्रां निवासी देवीदयाल ठाकुर, मड़घन निवासी डा. सीता राम ठाकुर और दली निवासी बाला राम ठाकुर ने कहा कि विभाग ने आज तक फिल्टर टैंकों का निर्माण नहीं करवाया है। उन्होंने विभाग से स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की मांग की है।

समिति के समक्ष रखा है मामला
हाल ही में प्राक्कलन समिति के समक्ष इस मामले को उठाया है। फिलहाल इसके लिए धन का प्रावधान नहीं है। बजट की व्यवस्था होते ही योजना को सिरे चढ़ाया जाएगा।
पीबी वैद्य अधीक्षण अभियंता आईपीएच कुल्लू

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