
कुल्लू। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में दोनों सर्जनों के छुट्टी पर होने से सोमवार को मरीजों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी। खासकर सर्जिकल के मरीज परेशान हुए। चार दिन से दोनों विशेषज्ञ अवकाश पर हैं। लोगों का कहना है कि क्षेत्रीय अस्पताल में मरीजों की बढ़ती तादाद के हिसाब से सर्जन विशेषज्ञों के अतिरिक्त पद सृजित किए जाने चाहिए।
बरसात का मौसम होने से आजकल अस्पताल में मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है। यहां की तमाम ओपीडी के बाहर मरीजों की लंबी-लंगी कतारें लगी रहती हैं। एक तरफ अस्पताल में डाक्टरों का टोटा चल रहा तो दूसरी तरफ मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आलम यह है कि अस्पताल में तैनात डाक्टरों को भी तय अवधि से अधिक काम करना पड़ रहा है। एक या दो चिकित्सक छुट्टी पर चले जाएं तो अस्पताल में व्यवस्था बिगड़ जाती है। हर रोज अस्पताल में 700 से 800 मरीज पहुंच रहे हैं।
कुल्लू में लगभग नौ करोड़ की लागत से छह मंजिला अस्पताल बना है। स्टाफ की कमी के अलावा तीन विशेषज्ञ चिकित्सकों ने त्यागपत्र भी दे दिया है। इससे स्थिति और खराब हो गई है। सैकड़ों महिलाओं की देखभाल मात्र दो डाक्टरों के हवाले हैं। लाइनों में खड़ी महिलाएं तो परेशान हैं ही लेकिन यहां तैनात विशेषज्ञ अन्य डाक्टरों की हालत भी खराब है।
चार दिन से दोनों सर्जन स्पेशलिस्टों के अवकाश पर रहने से मरीज काफी परेशान हैं। पत्थरी और अपेंडिक्स के आपरेशन भी रुके पड़े हैं। डाक्टरों के अवकाश पर रहने से मरीजों को मजबूरन अपना इलाज निजी क्लीनिकों में करवाना पड़ रहा है। सैंज घाटी से संबंध रखने वाले इंद्र सिंह और मणिकर्ण के तुले राम का कहना है कि वे पत्थरी के मरीज हैं। तीन दिन से लगातार अस्पताल पहुंच रहे हैं लेकिन सर्जन नहीं मिले। इसके अलावा सोमवार को क्षेत्रीय अस्पताल उपचार के लिए आई सोनिका, रजनी, मणि देवी तथा सुनीता का कहना है कि अस्पताल में भारी भीड़ है। लाइन में लगने के बाद भी जब नंबर नहीं आया तो निजी क्लीनिकों में उपचार करवाना पड़ा। लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि जल्द ही यहां खाली चल रहे डाक्टरों के पद भरे जाएंगे।
एसएमओ डा. कमल कपूर का कहना है विशेषज्ञों की कमी से मरीजों को परेशानी तो हुई है। कहा कि 31 जुलाई तक दोनों सर्जन छुट्टी पर रहेंगे। विभाग के उच्च अधिकारियों और सरकार से भी इस समस्या बारे गंभीरता से बात चल रही है।
