स्पेन पर टिका ग्रामीणों का जीवन

काईस (कुल्लू)। सड़क को प्राथमिकता देने वाली प्रदेश सरकार के दावों की जमीनी स्तर पर हवा निकल गई है। आजादी के 66 साल बीत जाने के बाद भी कुल्लू जिले के 366 गांव सड़क से नहीं जुड़ पाए हैं। अति दुर्गम इलाकों में बसे इन लोगों का जीवन तार स्पेन पर टिका हुआ है। दुर्गम इलाकों के इन गांवों में उगाई जाने वाली साग-सब्जियों और फलों को मंडियों तक तार स्पेन से ही पहुंचाया जाता है। सबसे बड़ी मुसीबत तब हो जाती है जब कोई बीमार हो जाए। मरीज को सड़क तक पहुंचाने के लिए कुर्सी या चारपाई का सहारा लेना पड़ता है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक अधिकतर सड़कों की डीपीआर तैयार है लेकिन वन विभाग की एनओसी न मिलने तथा भूमि विवाद के चलते कार्य लटके पड़े हैं। इसके चलते कुल्लू जिले की एक दर्जन सड़कों का निर्माण कार्य अधर में रुका है। आनी, निरमंड में 221 गांव सड़क से नहीं जुड़ सके हैं। कुल्लू डिवीजन-1 में 84 गांव, कुल्लू-2 में 61 गांव सड़क सुविधा से महरूम हैं। उधर, शाकटी-मरोड़, शुगार, सजवाड़, बनोण, गाड़ापारली, शिल्ही, देहुरीधार, श्रीकोट, रोपा, कमेड़ा, घलिंगचा, थानेगाड़, धारा-घौट, धारा-शरण, तांदला आदि गांव सड़क सुविधा से वंचित हैं। उधर, लोक निर्माण विभाग कुल्लू के अधीक्षण अभियंता ललितभूषण ने कहा कि वन विभाग से एनओसी नहीं मिलने के कारण तथा कई जगहों पर ग्रामीण भूमि नहीं दे रहे हैं, इसी के चलते सड़काें का निर्माण कार्य अधर में लटका है। उन्होंने बताया कि लोगों को सुविधा देने में लोनिवि प्रयासरत है।

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