
शुक्रवार को सोशल साइट्स को लेकर पहली बार दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को दिशा निर्देश जारी किए।
इमें सोशल मीडिया के साथ इंटरनेट और वेबसाइट्स के जरिए प्रत्याशी के प्रचार के सभी माध्यमों पर आयोग नजर रखेगा।
चुनाव आयोग ने पाया कि राजनीतिक दल व प्रत्याशी पांच तरीकों से वर्चुअल दुनिया में अपना प्रचार प्रसार कर रहे हैं।
इसमें विकीपीडिया, ट्विटर अकाउंट, यूट्यूब, फेसबुक और ऐप्स जैसे विकल्प अपनाकर वर्चुअल नेटवर्क से जुड़े लोगों तक पहुंच रहे हैं।
इसका कारण है कि बीते कुछ सालों में इसका प्रयोग करने वाली संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।
चुनाव आयोग ने यह भी पाया गया है कि सोशल मीडिया पर प्रचार के दौरान इलेक्टोरल लॉ की भी अनदेखी की जा रही है।
इसलिए इस पर दूसरे प्रचार माध्यमों की तरह इसपर भी निगरानी रखने का निर्णय लिया है।
दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय देव ने बताया कि चुनाव आयोग के नए निर्देश को ध्यान में रखकर जल्द ही राजनीतिक दलों को सूचित कर दिया जाएगा।
सोशल मीडिया इंटरनेट पर प्रत्याशी से मिली सूचना के आधार पर नजर रखी जाएगी। इस पर निगरानी के लिए जल्द ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
तीन स्तर पर कसेंगे नकेल
1. नामांकन के दौरान देनी होगी सोशल मीडिया अकाउंट की सूचना
आयोग ने साफ किया है कि नामांकन के समय फॉर्म नंबर 26 के शपथ पत्र के साथ इंटरनेट पर प्रचार की सारी जानकारी देनी होगी।
इसमें प्रत्याशी का मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी और सोशल मीडिया पर बनाए गए सभी अकाउंट्स की सूचना देनी होगी।
2. सोशल मीडिया पर प्रचार से पहले लेनी होगी मंजूरी
आयोग के नए निर्देश के मुताबिक अब दूसरे प्रचार के तरीकों की तरह प्रत्याशी को सोशल मीडिया पर कुछ भी प्रचार का तरीका अपनाने से पहले उसे मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनीटरिंग कमेटी (एमसीएमसी) से मंजूरी लेनी होगी।
इसके लिए वही प्रक्रिया होगी जो कि प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के प्रचार सामग्री के लिए मंजूरी लेने की होती है।
3. सोशल मीडिया के खर्च का बनाना होगा खाता
आयोग ने कहा कि सेक्शन 77 सब सेक्शन (1) के तहत सभी प्रत्याशियों को सोशल मीडिया पर खर्च का अलग ब्येरा बनाना होगा।
इसमें सोशल मीडिया पर प्रचार प्रसार के लिए कंपनियों को दिए गए भुगतान से लेकर उस चलाने वाली टीम के सभी खर्चे भी शामिल होंगे।
चुनाव आयोग की मॉनीटरिंग कमेटी इस पर अलग से निगरानी रखेगी।
