
खराहल (कुल्लू)। बगीचों में सेब के दाने अब अखरोट से थोड़ा बड़ा आकार पा चुके हैं। सेबों से लदे पौधों को देखकर बागवान भी इस बार मोटी कमाई की उम्मीद में है। यही नहीं कुल्लू का सेब सीजन जहां हजारों परिवारों की रोजी रोटी का जरिया है वहीं सैकड़ों लोगों को सीजन के दौरान रोजगार भी मिलता है। इसके अलावा ट्रक और अन्य छोटे मालवाहक आपरेटरों को भी सेब सीजन का खास इंतजार है।
जिले में इस बार पर्याप्त बारिश और बर्फबारी के चलते फलों का रिकॉर्ड उत्पादन होने की उम्मीद है। सबसे ज्यादा उत्पादन 2010 में हुआ था। उस समय 2.17 लाख मीट्रिक टन सेब और अन्य फलों की पैदावार हुई थी। इस बार 2.24 लाख मीट्रिक टन सेब तथा अन्य फलों का उत्पादन होने की उम्मीद जताई जा रही है। लेकिन यह सब मौसम के मिजाज पर निर्भर है। अधिक पैदावार के चलते सभी वर्गों को कामकाज भी भरपूर मिलेगा। तुड़ाई और भराई करने वालों से लेकर ट्रक आपरेटरों की आय में खासा इजाफा होने की उम्मीद है। सीजन के दौरान कुल्लू, मंडी, शिमला और किन्नौर जिला में हजारों लोगों को काम मिलता है। प्रदेश में करीब 12 लाख लोग बागवानी से प्रत्यक्ष और परोक्ष रुप से जुड़े हैं। सेब उत्पादकों से लेकर तुड़ाई-भराई करने वाले श्रमिक सड़कों तक माल पहुंचाने वाले खचर मालिक, झूले वाले, ट्रक, पीअप जीप आपरेटर, आढ़ती आदि इसमें शुमार होते हैं। प्रगतिशील बागवान एवं पूर्व विधायक चंद्रसेन ठाकुर ने कहा कि अच्छी पैदावार से इस साल हजारों लोगों को फायदा होगा।
चार हजार करोड़ से अधिक आमदनी
बागवानी विभाग के उपनिदेशक बीसी राणा ने बताया कि इस वर्ष प्रदेश में 6 से 8 लाख मीट्रिक टन फसल होने की उम्मीद है। हिमाचल को चार हजार करोड़ रुपये या इससे अधिक की आमदनी हो सकती है। जिला में 2.24 लाख मीट्रिक टन फलों का उत्पादन होने की उम्मीद है। यह करीब 1 करोड़ सेब पेटी होगा।
