
नई दिल्ली। कैश फॉर वोट मामले में आरोपी सुधींद्र कुलकर्णी ने पुलिस पर दुर्भावना पूर्ण जांच करने का आरोप लगाया है। आरोपी ने कहा कि उसकी भूमिका स्टिंग के जरिए भ्रष्टाचार को उजागर करने तक ही सीमित है।
तीस हजारी स्थित स्पेशल जज नरोत्तम कौशल के समक्ष सुधींद्र कुलकर्णी ने कहा कि पुलिस इस मामले में सांसदों की खरीद फरोख्त की जांच करने में नाकाम रही है। उन्होंने दावा किया कि यूपीए एक सरकार को बचाने के लिए 22 जुलाई 2008 को सांसदों की खरीद फरोख्त की गई थी।
अदालत में सोमवार को आरोपों पर बहस की सुनवाई हुई। इस मामले में पूर्व सपा नेता अमर सिंह, भाजपा सांसद अशोक अरगल, फग्गन सिंह कुलस्ते व पूर्व सांसद महावीर सिंह भागौरा, भाजपा कार्यकर्ता सुहेल हिंदुस्तानी और संजीव सक्सेना आरोपी हैं।
आरोपों पर बहस के दौरान कुलकर्णी के अधिवक्ता महीपाल सिंह व एस सोरेन ने हाईकोर्ट के नवंबर 2011 के उस आदेश का हवाला दिया जिसमें कुलकर्णी, कुलस्ते, भागौरा, हिंदुस्तानी व सक्सेना को जमानत दी गई थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि याचिकाकर्ताओं में से किसी ने भी इस भ्रष्टाचार का फायदा नहीं उठाया। अभियोजन का भी कहना है कि सांसदों ने यह खुलासा भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए कहा था।
