
अमृतसर: नगर निगम का सीवरेज विभाग सरकार पर करोड़ों का बोझ बन चुका है व उक्त विभाग के अधिकारी बेकार में हजारों रुपए वेतन के रूप में डकार रहे हैं। अगर गुरु नगरी की गलियों व बाजारों का दौरा किया जाए तो नगर निगम के सीवरेज विभाग की कार्यप्रणाली की पोल खुलती नजर आएगी। उक्त विभाग के उच्चाधिकारी अपनी नालायकी का सारा जिम्मा निचले स्टाफ पर डालने से कतई गुरेज नहीं करते।
महानगर में थोड़ी-सी बारिश होने पर नगर निगम की पोल सीवरेज विभाग की लचर कार्यप्रणाली द्वारा पूरी तरह से खोल कर रख दी जाती है व सारे शहर का जिम्मा संभालने वाला नगर निगम कार्यालय खुद भी असहाय होकर वर्षा के पानी में पूरी तरह से डूब जाता है। अव्वल तो लोगों द्वारा शिकायत किए जाने के बावजूद सीवरेज विभाग का कोई कर्मचारी काम करने के लिए आता ही नहीं। अगर आ ही जाते हैं तो लोगों को कहते हैं कि विभाग के पास ढक्कन नहीं हैं।
दूसरी ओर मैनहोलों से गार निकालने के बाद गंदगी का ढेर वहीं का वहीं छोड़ जाते हैं। पंजाब केसरी टीम द्वारा अकस्मात पूरे शहर का दौरा करने पर देखा गया कि अव्वल तो कई मैनहोलों पर ढक्कन लगे ही नहीं हैं। अगर लगे हैं तो वे या तो जमीन में पूरी तरह से धंसे हैं या फिर सड़क के लैवल से तीन-चार इंच ऊंचे हैं जिस कारण सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ौतरी हो रही है। मैनहोल पर ढक्कन लगाने की बजाय उसे पत्थर व सिल से ढक कर हादसों को न्यौता दिया जा रहा है। रेलवे स्टेशन के मेन एंट्री गेट के बाहर बनाए गए मैनहोल का ढक्कन पिछले लगभग कई महीनों से सड़क के लैवल से काफी नीचा होने के कारण जहां यात्रियों व सैलानियों की परेशानियों का कारण बना हुआ है, वहीं उक्त रोड पर यातायात अधिक होने के कारण हर समय हादसों का सबब बना हुआ है। शहर के पॉश कहे जाने वाले क्षेत्र लारेंस रोड में कई स्थानों पर नगर निगम द्वारा लगवाए गए मैनहोल के ढक्कन या तो बुरी तरह से जमीन में धंस चुके हैं या फिर सड़क के लैवल से काफी ऊंचे होने के कारण रोजाना हादसों को न्यौता देते नजर आ रहे हैं।
नगर निगम द्वारा करोड़ों की लागत से बनवाई गई एलीवेटिड रोड के चारों छोर पर वर्षा के दौरान पानी जमा होने के कारण वाहन चालकों का क्षेत्र से निकलना मुश्किल हो जाता है। उक्त मेन रोड पर भी कई मैनहोल के ढक्कन जमीन में पूरी तरह से धंस चुके हैं परन्तु इन धंसे व बिना ढक्कन वाले मैनहोल की ओर नगर निगम प्रशासन का शायद अभी तक ध्यान नहीं है या फिर प्रशासन किसी बड़े हादसे के इंतजार में है?
उल्लेखनीय है कि गत वर्ष हुई कनिका की अचानक मृत्यु के बाद नगर निगम प्रशासन द्वारा साफ तौर पर कहा गया था कि जिस किसी भी एस.डी.ओ. या जे.ई. के क्षेत्र में बिना ढक्कन के मैनहोल या फिर खराब व धंसे हुए मैनहोल दिखाई दिए, उसके खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी परन्तु क्या उपरोक्त स्थानों पर धंसे व बिना ढक्कन के मैनहोल विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों को नजर नहीं आते?
