
चंबा। पिछले 50 वर्षों से सेवाएं दे रहे रहे होमगार्ड जवानों के लिए कोई ठोस नीति नहीं बन पाई है। साथ ही भर्ती, पदोन्नति, पगार एवं ड्यूटी के समय का सही निर्धारण नहीं हो पाया है। इससे होमगार्ड जवानों को काफी मुश्किलें झेलनी पड़ रही हैं। आल इंडिया होमगार्ड यूनियन के जिलाध्यक्ष हेम सिंह जसरोटिया ने बताया कि देश की आंतरिक एवं बाहरी सुरक्षा में अहम भूमिका अदा करने वाले होमगार्डों को सेवा अवधि पूरी करने के बाद न तो कोई पेंशन दी जाती है और न ही वित्तीय लाभ प्रदान किया जाता है। देश में वर्ष 1962 में होमगार्डस संस्था का गठन किया था। सरकार ने होमगार्ड के बाद कई सुरक्षा संगठन देश की सुरक्षा के लिए खड़े किए।
होमगार्ड संस्था के बाद बनने वाली एसएसबी, बीएसएफ, आईटीबीपी फोर्स के लिए स्थायी नीति बनाई गई है और और इनमें सेवाएं दे रहे समस्त जवान पक्के हो चुके हैं। देश में सेवाएं दे रहे छह लाख के करीब होमगार्ड जवानों में सरकार के प्रति मलाल है।
जिलाध्यक्ष ने बताया कि हिमाचल में विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों में आठ हजार गृहरक्षक पुलिस विभाग और अन्य विभागों में निष्ठा के साथ सेवाएं दे रहे हैं। पंजाब में होमगार्ड जवानों को 386 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से वेतन दिया जा रहा है, हिमाचल में जवानों को मात्र 225 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दिहाड़ी दी जा रही है। गृह रक्षकों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। अन्य विभागों के कर्मियों को सरकार दैनिक भत्ते, अनुकंपा के आधार पर नौकरी प्रदान करती है लेकिन गृह रक्षकों के लिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। गृह रक्षकों को मर्जी अनुसार सेवाएं लेने के बाद साल में दो-तीन महीने घर में
बिठा दिया जाता है। इससे गृह रक्षकों के मनोबल पर असर पड़ना स्वाभाविक है।
हेम सिंह जसरोटिया ने कहा कि प्रदेश के 8000 गृहरक्षक मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से आस लगाए बैठे हैं कि वे विस चुनावों में होमगार्ड जवानों के साथ किए गए वायदे को पूरा करेंगे और स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पंजाब की तर्ज पर वेतन बढ़ोतरी का तोहफा देंगे।
