सियासी गर्मी संग चढ़ा प्याज का पारा

नई दिल्ली। राजधानी की गरम होती सियासत के बीच प्याज का पारा एक बार फिर ऊपर जा रहा है। एक हफ्ते के भीतर थोक बाजार में प्याज की कीमत बीस फीसदी ज्यादा रही। कारोबारियों की मानें तो गिरती आवक के बीच फिलहाल इसके थमने के आसार नहीं दिखते। एक महीने तक प्याज लोगों के आंसू निकालेगा। खुदरा कारोबारी मान रहे हैं कि हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले समय में कीमत सौ रुपये प्रति किलो से ऊपर जा सकती है।
राजधानी की मंडियों में प्याज की कीमत मंगलवार को 60 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। इसका सीधा असर खुदरा बाजार पर पड़ा। साउथ दिल्ली, पूर्वी दिल्ली समेत राजधानी की लगभग सभी कालोनियों में इसकी कीमत करीब 80 रुपये रही। वहीं, मदर डेयरी, सफल जैसे रिटेल स्टोर पर यह 75 रुपये में बिका। खान मार्केट के खुदरा कारोबारी रमेश कुमार ने कहा कि अगर थोक में 60 रुपये में प्याज मिलेगी तो ट्रांसपोर्ट आदि का खर्च जोड़ने पर कीमत 80 रुपये प्रति किलो चली ही जाएगी।
ओनियन मर्चेंट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंदर बुद्धिराजा के मुताबिक, इसकी वजह सरकार है। जून में प्याज की कीमत दस रुपये प्रति किलो से कम होने के बावजूद दिल्ली सरकार ने जहां इसे स्टोर करने का इंतजाम नहीं किया। वहीं, जुलाई में 35 रुपये कीमत होने के बाद भी केंद्र सरकार ने इसके निर्यात पर रोक नहीं लगाई। इसका असर आज दिख रहा है। मंगलवार को मंडी का रेट 60 रुपये से खुला। वहीं वेजीटेबल ट्रेडर्स एसोसिएशन की वर्किंग कमेटी के सदस्य सुभाष चुग ने बताया कि, मौजूदा आवक से साफ है कि थोक बाजार में कीमत 80 रुपये तक जा सकती है। एक महीने बाद जब नई फसल आएगी, तभी कीमत थम सकती है।
कम आवक से बढ़ी परेशानी
नोएडा। राजस्थान, महाराष्ट्र और एमपी से आवक आधी होने के चलते मंडियों में प्याज के दाम आसमान पर पहुंच गए हैं। मंगलवार को आजादपुर मंडी में करीब 60 ट्रक (एक ट्रक में 16 हजार किलो) प्याज की आवक हुई। आम दिनों में यहां करीब 110 ट्रक प्याज बाहर की मंडियों से पहुंचता है। वहीं, साहिबाबाद मंडी में पांच से छह ट्रक की अपेक्षा केवल दो ट्रक प्याज पहुंचा। साहिबाबाद मंडी में थोक आढ़ती नदीम असलम ने बताया कि मंडी में प्याज 5500 रुपये प्रति कुंतल से 6 हजार रुपये प्रति कुंतल बिक रहा है। अक्तूबर में महाराष्ट्र के नासिक और धूलिया, राजस्थान के अलवर और कर्नाटक से प्याज की नई फसल आनी शुरू हो जाएगी। उसके बाद ही दाम नीचे आएंगे।
जमाखोरी से बढ़ रहे दाम
जानकारों का कहना है कि, मुनाफाखोरों ने कई जगह जमाखोरी शुरू कर दी। इससे प्याज के दाम दोबारा आसमान पर पहुंच गए हैं। इसके अलावा प्याज के निर्यात जारी रहने से और कमी बढ़ गई।
टमाटर भी हुआ लाल
प्याज की देखादेखी टमाटर बेचने वाले फुटकर सब्जी विक्रेता खूब चांदी काटने में लगे हैं। टमाटर के दाम भी फुटकर सब्जी मंडियों में खूब चढ़ गए हैं। फुटकर मंडियों में टमाटर 40 रुपये प्रति किलो तक बेचा जा रहा है।

नेफेड की चूक से जनता बेहाल
नई दिल्ली। प्याज की महंगाई को सरकारी एजेंसियां कितने हल्के में ले रही हैं, इसे नेशनल एग्रीकल्चर कोओपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन (नेफेड) के फैसलों से समझा जा सकता है। दो बार टेंडर निकालने के बावजूद नेफेड ने प्याज का आयात नहीं किया। करीब 15 दिन पहले फेडरेशन को 40 रुपये किलो के भाव पर दिल्ली में प्याज उपलब्ध हो रहा था, लेकिन ऑर्डर देने के बजाय नेफेड ने टेंडर कैंसिल कर दिया। इसके बाद निकाले गए एक दूसरे टेंडर में भी 43.68 रुपये के भाव पर प्याज मिल सकता था, लेकिन नेफेड ने प्याज नहीं मंगाया। इस चूक का नतीजा यह है अब मंडियों में भी प्याज का भाव 60 रुपये किलो तक पहुंच चुका है और आम जनता 70-80 रुपये किलो का प्याज खाने का मजबूर है।
नेफेड के अध्यक्ष डॉ. बिजेंद्र सिंह ने बताया कि, विदेशों से प्याज खरीद के लिए निकाले गए पहले टेंडर में 39.75 और दूसरे ग्लोबल टेंडर में 43.68 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर दिल्ली में प्याज पहुंचाने की पेशकश की गई थी। लेकिन करीब दो सप्ताह पहले प्याज के दाम कम होने लगे थे, इसे देखते हुए नेफेड ने प्याज का आयात नहीं किया। सिंह ने माना कि, जिस तरह प्याज की कीमतें फिर से बढ़ी है, उसे देखते हुए नेफेड की रणनीति नाकाम रही है। हालांकि, कुछ व्यापारी पाकिस्तान से भी प्याज मंगा रहे हैं, लेकिन इसकी मात्रा इतनी ज्यादा नहीं है कि कीमतों पर बहुत असर पडे़। अगर नेफेड ने भारी मात्रा में आयात किया होता तो प्याज की महंगाई को काबू में रखा जा सकता था।
उधर, महाराष्ट्र और कर्नाटक में बारिश के चलते मंडियों में प्याज की आवक कम हुई है। महाराष्ट्र की पीपल गांव मंडी में आवक सप्ताह भर के अंदर घटकर आधी रह गई है और अधिकतम 59 रुपये किलो तक प्याज बिक रहा है। इसी तरह लालस गांव मंडी में भी प्याज के दाम 58 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं।

फिर लगेगी सरकारी दुकान
नई दिल्ली। चुनावी दौर में प्याज की बढ़ती कीमतों ने दिल्ली सरकार को बेचैन कर दिया है। आनन-फानन में सरकार मंगलवार को दुबारा सक्रिय हुई। दिल्ली कृषि विपणन बोर्ड की बैठक में विकास मंत्री राजकुमार चौहान ने मंडी समितियों की बैठक बुलाई। इस दौरान फैसला लिया गया कि, दिल्लीवासियों को थोक दर पर प्याज मुहैया कराया जाएगा।
बैठक में लंबी हीला-हवाली के बाद आखिर में 60 रुपये की कीमत तय हुई। इस दौरान तय हुआ कि मंडियों में सरकारी प्याज की दुकान खुलेगी। वहीं, प्याज से लदी करीब 150 मोबाइल वैन राजधानी की कॉलोनियों में चक्कर लगाएगी। इस मामले में चुनावी दबाव इस कदर दिखा कि दिल्ली सचिवालय में मंगलवार को ही दुकान भी लगा दी। वहीं, बगैर तैयारी के करीब 30 वैन को कॉलोनियों में भी भेज दिया गया।
राजकुमार चौहान के मुताबिक, महाराष्ट्र में गणेश उत्सव और कर्नाटक की बारिश से आवक प्रभावित हुई है। आम दिनों में नए प्याज के 30-35 ट्रकों की तुलना में मंगलवार को सिर्फ पांच ट्रक आए। फिर भी सरकार की कोशिश है कि लोगों को सही दर पर प्याज मिले। इसके लिए इंतजाम किए गए हैं।

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