सिंधी स्वीट्स पर 14 करोड़ 7 लाख जुर्माना

चंडीगढ़: सैक्टर-17 स्थित सिंधी स्वीट्स के खिलाफ डिप्टी कमिश्नर मोहम्मद शाइन ने ऑर्डर जारी कर शॉप मालिकों की दुविधा बढ़ा दी है। पिछले काफी समय से सिंधी स्वीट्स पर प्रॉपर्टी के मिसयूज का मामला भी चल रहा है। अब डिप्टी कमिश्नर ने सिंधी स्वीट्स पर फाइन लगाने का ऑर्डर जारी कर दिया है।

ऑर्डर में कहा गया है कि सिंधी स्वीट्स के मालिक और वहां कारोबार करने वालों को मिसयूज के बदले 14 करोड़ 7 लाख का जुर्माना चुकाना होगा। यह पैसा सिंधी स्वीट्स द्वारा 16 अक्तूबर 2012 तक किए गए मिसयूज के बदले चुकाना होगा। हालांकि ऑर्डर में कहा है कि 16 अप्रैल 2013 तक हुए मिसयूज का कैल्कूलेशन अभी बाकी है। जिसके बाद राशि और बढ़ जाएगी।

मिसयूज के लिए नोटिस

ऑर्डर में कहा है कि साइट नंबर-108 और 109 को बे शॉप और ऑफिस के तौर पर 10 दिसम्बर 1062 में अलॉट किया था। अलाटमैंट के समय यह कंडीशन लगाई थी कि साइट का प्रयोग सिर्फ केवल जनरल ट्रेड के लिए नहीं होगा।

हरदीत सिंह बस्सी व अन्य ने यह साइट 28 जुलाई 1975 को खरीदी और 1 नवम्बर 1975 को यह उनके नाम पर ट्रांसफर हो गई। 10 दिसम्बर 2008 को कैपिटल ऑफ पंजाब (डिवैल्पमैंट एंड रैगुलेशन) एक्ट, 1952 के अंडर-8 ए और चंडीगढ़ एस्टेट रूल्स-2007 के नियम 10 और 14 के तहत बेसमैंट के मिसयूज के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।

रिज्यूम हो चुकी है साइट

बिल्डिंग वायलेशन के लिए चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा इस साइट को रिज्यूम करने के ऑर्डर भी जारी किए जा चुके हैं। यह ऑर्डर 28 मार्च 2011 और 17 अप्रैल 2011 को जारी हुए थे लेकिन बावजूद इसके मलिक और अन्य कारोबारियों ने इस मिसयूज को बंद नहीं किया। जिस पर 8 जनवरी 2013 को पहला कारण बताओ नोटिस जारी हुआ था।

अप्रैल में हुई थी एक और इंस्पैक्शन

मामला जब चीफ एडमिनिस्ट्रेटर के सामने पहुंचा तो फिर सिंधी स्वीट्स की इंस्पैक्शन के लिए टीम भेजी गई। तहसीलदार (इंस्पैक्शन) के नेतृत्व में टीम ने फिर सिंधी स्वीट्स का मुआयना किया। इसमें पाया कि मिसयूज अभी भी जारी है।

इसके बाद रिपोर्ट तैयार की गई कि मालिक और अन्य कारोबार चलाने वालों को बार-बार नोटिस भेजा गया, एक मौका पर्सनल हियरिंग का भी मिला लेकिन बावजूद इसके नियमों का पालन नहीं किया गया। जिसके बाद जुर्माना राशि जारी कर दी गई।

आर्कीटैक्चुरल नॉर्म्स का उल्लंघन

अपने ऑर्डर में डी.सी. ने लिखा है कि सिंधी स्वीट्स के मालिक और अन्य कारोबारियों द्वारा चाहे जितने मर्जी बहाने बनाए जाएं लेकिन यहां आर्कीटैक्चुरल नॉर्म्स का उल्लंघन हुआ है। इसके साथ ही नैशनल बिल्डिंग कोड की भी अनदेखी की गई है। इस साइट की ऊपरी मंजिलों को केवल ऑफिस के रूप में प्रयोग किया जाना था। जबकि ग्राऊंड फ्लोर में शॉप चलाई जा सकती है।

हालांकि परमिशन लेने के बाद साइट को कन्वर्ट कर कमर्शियल गतिविधियां चलाई जा सकती हैं लेकिन उसके लिए भी नैशनल बिल्डिंग कोड का उल्लंघन नहीं हो सकता लेकिन साइट के मालिक ने बिना कन्वर्ट किए ही ऊपरी फ्लोर पर कमर्शियल गतिविधियां शुरू कर दी। ऐसे में बिल्डिंग वायलेशन का दोषी पाया गया। रिज्यूम साइट में इस तरह का मिसयूज बिल्कुल गलत है।

यहां पाई गई खामियां

.बेसमैंट का प्रयोग सिंधी स्वीट्स द्वारा स्टोर के रूप में किया जा रहा है।
.पहले फ्लोर को सिंधी स्वीट्स के नाम पर रैस्टोरैंट के रूप में चलाया जा रहा है।
.दूसरे फ्लोर को भी सिंधी स्वीट्स के नाम पर रैस्टोरैंट के रूप में प्रयोग किया जा रहा है।
.तीसरे फ्लोर को भी सिंधी स्वीट्स के नाम पर रैस्टोरैंट के रूप में प्रयोग किया जा रहा है।
.चौथे फ्लोर को सिंधी स्वीट्स के नाम पर टेलरिंग वर्कशॉप के रूप में प्रयोग किया जा रहा है।

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