सामने आई भाजपा पार्षदों की दोहरी नीति

नई दिल्ली। उत्तरी दिल्ली नगर निगम के वार्ड नंबर 152 नारायणा के निर्दलीय पार्षद की सदस्यता रद्द करने के मसले में सत्तारूढ़ भाजपा फंस गई है। तीन माह तक सदन की बैठकों में नहीं आने पर भाजपा पार्षदों ने दिसंबर में उनकी सदस्यता खत्म करने की सिफारिश की थी, लेकिन अब उसके भाजपा में शामिल होने पर वे चुप्पी साध गए।
डीएमसी एक्ट के तहत तीन माह तक सदन की बैठक में बिना सूचना दिए गैर हाजिर होने पर पार्षद की सदस्यता रद्द करने का प्रावधान है। वार्ड नंबर 152 नारायणा से निर्दलीय पार्षद प्रमोद तंवर सितंबर, अक्तूबर और नवंबर में सदन की बैठकों में शामिल नहीं हुए थे। इस कारण निगम सचिव ने दिसंबर में उनकी सदस्यता करने का प्रस्ताव सदन में प्रस्तुत किया, जिसे भाजपा पार्षदों ने पारित करके उप राज्यपाल के पास भेज दिया। वहीं, एक मामले में प्र्रमोद तंवर के निर्वाचन को निचली अदालत ने रद्द कर दिया, लेकिन ऊपरी अदालत से उसे राहत मिल गई। उपराज्यपाल ने भी मामला नगर निगम के पास भेज दिया, लेकिन भाजपा पार्षदों ने फिर सदस्यता रद्द करने के प्रस्ताव को पास करके उपराज्यपाल को भेज दिया। उपराज्यपाल ने पहले की भांति मामला फिर निगम को वापस कर दिया। इस बार आयुक्त ने मुख्य विधि अधिकारी से मामले पर राय ली। अधिकारी ने बताया कि डीएमसी एक्ट के तहत प्रमोद तंवर के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इसके बाद कमिश्नर के निर्देश पर निगम सचिव सदन की पिछली बैठक में उनकी सदस्यता रद्द करने का प्रस्ताव ले आए, लेकिन इस बार भाजपा पार्षदों के सुर बदले हुए थे। उन्होंने प्रस्ताव पास करने में कोई रुचि नहीं ली और इसे स्थगित कर दिया। सूत्रों के अनुसार, ऐेसा उन्होंने प्रमोद तंवर के गत दिनों भाजपा में शामिल होने के चलते किया। वह पहले भाजपा से बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़े थे।

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