समाज के ‘ठेकेदारों’ के आगे विभाग नतमस्तक

ऊना। एक तरफ 21वीं सदी में देश महिला सशक्तिकरण की ओर बढ़ रहा है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानून की धाराओं में बदलाव की बयार है। दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश के सीमांत जिला ऊना की एक पंचायत के आदेश पर एक महिला को महज इसलिए प्रताड़ित कर दिया गया कि उसने अपने ही गांव के युवक से शादी कर ली। हद तो तब हो गई जब पंचायत द्वारा सामाजिक बहिष्कार के बाद सरकारी विभाग ने भी पंचायत के तुगलकी फरमान पर मुहर लगाते हुए इस मामले की जांच कराने के बजाय महिला कार्यकर्ता का तबादला कर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की।
सामाजिक न्याय एवं बाल कल्याण विभाग समाज के कुछ ठेकेदारों के आगे नतमस्तक हो गया। महिला आंगनबाड़ी केंद्र में बतौर कार्यकर्ता तैनात है। पिछले दिनों उक्त महिला अपने ही गांव के एक युवक से परिणय सूत्र में क्या बंधी, समाज इस दंपति के पीछे पड़ गया। सोमवार को आंगनबाड़ी केंद्र में पहुंचे विभागीय अधिकारियों ने उसका गांव के ही दूसरे केंद्र में तबादला तो कर दिया, लेकिन समाज के दिए जख्मों को सह रही इस महिला के लिए न्याय के बजाय तबादला आदेश इस बात की तस्दीक करता है कि समाज के अपने कायदों के आगे शासन-प्रशासन कहीं नहीं ठहरता। दो परिवारों की रजामंदी के बावजूद सूचना एवं क्रांति के इस युग में भी अगर समाज ऐसे मामलों पर हावी है तो इसकी जांच की जरूरत समझी जा रही है।
ग्राम पंचायत प्रधान प्रोमिला ठाकुर की दलील है कि विभाग ने उक्त महिला कार्यकर्ता का तबादला कर दिया है, जिससे यह विवाद खत्म हो गया। लेकिन बुद्धिजीवियों की नजर में यह न तो नैतिक स्तर पर और न ही कानूनी स्तर पर किसी तरह का गुनाह है, जिसकी इस दंपति को सजा दी गई। वहीं, महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी रणजीत सिंह का कहना है कि ग्रामीणों की आपसी सहमति के बाद दूसरे केंद्र में उक्त महिला कार्यकर्ता के तबादले विवाद को शांत कर दिया गया है।

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