सबिसडी के चक्कर में दिहाड़ी भी गई

अंब (ऊना)। केंद्र सरकार की सबिसडी योजना के चक्कर में लोगों की दिहाड़ी भी जा रही है। दिहाड़ीदार सबिसडी के चक्कर में रुपये गंवा रहे हैं। दो-दो बार राशन और सिलेंडर तथा अन्य सामान लेने के बावजूद सबिसडी एक बार भी नहीं मिली। लोगों को पेश आ रही इस तरह की समस्याओं से प्रतीत हो रहा है कि प्रशासन की ओर से गई सारी तैयारियां महज कागजी औपचारिकता बनकर रह गई हैं। जिनके पास उचित साधन हैं वे चुपचाप बैठे हैं। मजदूरी कर गुजारा करने वाले लोग सबिसडी के चक्कर में अपनी दिहाड़ी गंवाने के साथ आर्थिक नुकसान भी झेल रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। दिहाड़ीदार सुभाष कुमार, रतन चंद, कुलदीप, राजन, राजेंद्र कुमार, शमशेर सिंह, रोशन लाल आदि ने सरकार के प्रति रोष जताते हुए कहा कि गैस सिलेंडर पहले 496 रुपये में आता था। अब सबिसडी खत्म होने के बाद उन्हें 1096 का सिलेंडर पड़ रहा है। कमर तोड़ महंगाई के इस दौर में पहले ही मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करना ही मुश्किल हो गया है। दूसरी तरफ जो पैसा गैस खरीदने में लग रहा है वह कब मिलेगा, इसका भी कोई पता नहीं है। उन्हाेंने बताया कि रसोई गैस सिलेंडर पर मिलने वाली सबिसडी के लिए उन्हें दिहाड़ी छोड़ कर बैंक और गैस एजेंसी के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। ऐसे में करीब 10-12 दिन वे खराब कर चुके हैं। दिहाड़ीदारों का कहना है कि जो कैश सबिसडी बैंक के मार्फत मिलनी है, यह व्यवस्था ऐसे लोगों के लिए होनी चाहिए, जिनकी आर्थिक दशा ठीकठाक हो। उन्होंने कहा कि सरकार को मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे लोगों को कैश सबिसडी पहले ही यानी गैस सिलेंडर खरीदने के वक्त ही देनी चाहिए, ताकि वे आसानी से गैस खरीद सकें। एसडीएम अंब सुखदेव सिंह ने कहा कि सरकारें जो भी योजनाएं चलाती हैं, वे लोगों की भलाई के लिए ही होती हैं। जिन लोगों की कैश सबिसडी राशि खाते में नहीं आ रही है, वे पूछताछ के बाद तमाम औपचारिकताएं पूरी करें। रसोई गैस की कालाबारी को रोकने के मकसद से ही योजना क्रियान्वित हुई है।

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