सफेदा, पापुलर पर प्रतिबंध नामंजूर

हरोली (ऊना)। प्रदेश कैबिनेट की बैठक में सफे दा और पापुलर पर सरकार की ओर से प्रतिबंध लगाए जाने के फैसले पर भाजपा जिला किसान मोर्चा भड़क उठा है। मोर्चा ने कहा कि प्रतिबंध से ऊना जिले को सबसे ज्यादा नुकसान है, क्योंकि जिलेभर के अधिकतर किसान पापुलर और सफेदा पर निर्भर हैं। अधिकतर किसानों ने अपनी जमीन के चारों ओर पापुलर और सफेदा लगा रखा है। पापुलर पांच वर्ष में कटाई के लिए तैयार होता है, जबकि सफेदा आठ वर्ष में। किसान वन विभाग से कटाई की अनुमति लेकर इन पेड़ों को काट देते हैं और लकड़ी मंडियों में ले जाकर बेचते हैं। इससे किसानों को फायदा होता है।
कटाई के बाद फिर से नई पौध लगाकर इसे तैयार किया जाता है। हिमाचल प्रदेश कैबिनेट की बैठक में सफेदा और पापुलर पर प्रतिबंध को लेकर निर्णय लिया गया है। भाजपा जिला किसान मोर्चा के अध्यक्ष रविंद्र जसवाल, हरोली किसान मोर्चा एवं हरोली पंचायत प्रधान सतीश ठाकुर, भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला सचिव एवं पंचायत समिति सदस्य अजय कुमार लवली, किसान सुरजीत कुमार, तिलक राज, पूर्व पंचायत समिति सदस्य अमित कुमार, चंद्रसेन, रमेश कुमार, सुनील कुमार और मनजीत आदि ने कहा कि सरकार को सफेदा और पापुलर से प्रतिबंध हटाना चाहिए, जिससे उन किसानों को लाभ मिले, जिनकी मलकीयत भूमि में पापुलर और सफेदा आदि कटाई के लिए तैयार है। इन किसानों ने कहा कि जमीन के इर्द-गिर्द सफेदा और पापुलर लगाने का फायदा यह भी होता है कि इससे बाड़बंदी के लिए खंभे आदि गाड़ने की जरूरत नहीं पड़ती। सफेदा और पापुलर के पेड़ ही कंटीली तार लगाते समय खंभे का काम भी करते हैं।

समस्या पर करें गौर
किसानों ने मुख्यमंत्री, वन मंत्री और उद्योग मंत्री से आग्रह किया है कि वे किसानों की इस समस्या पर गौर करें। इससे प्रदेश के हजारों किसानों को लाभ मिलेगा।

नहीं पहुंची अधिसूचना की प्रति
इस बारे में संपर्क करने पर ऊना के डीएफओ आरके कौशल ने कहा कि कैबिनेट के इस निर्णय की अभी तक उनके पास अधिसूचना की प्रति नहीं पहुंची है।

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