
हमीरपुर। प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है लेकिन पुलिस सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने में नाकाम साबित हो रही है। किसी बड़ी सड़क दुर्घटना के बाद पुलिस चालान करना शुरू कर देती है। मात्र चालान करके पुलिस औपचारिकताएं पूरी करने में लगी हुई है।
आंकड़ों पर नजर दौड़ाई तो प्रदेशभर में सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2008 के आंकड़ों पर नजर डालें तो कुल 2,756 सड़क हादसे हुए हैं। इनमें 848 लोगों ने जान गवाई, जबकि 4,714 लोग गंभीर घायल हुए। वर्ष 2009 में सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ 3,051 तक पहुंच गया। सड़क हादसों में 1,140 लोगों की मौत हुई। जबकि 5,579 लोग घायल हुए हैं। वर्ष 2010 से अब तक प्रदेशभर में कुल 9,950 सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें 3,557 लोग मौत का ग्रास बने हैं। 17 हजार 700 लोग विभिन्न हादसों में गंभीर घायल हुए हैं। उधर, आईजी पीएल ठाकुर का कहना है कि पुलिस विभाग सड़क दुर्घटनाओं को लेकर मुस्तैद है। विभाग द्वारा ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं। इन स्थानों पर चेतावनी बोर्ड अंकित किए जाएंगे।
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किस जिला में कितने ब्लैक स्पॉट
प्रदेश में कुल 313 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं। सोलन में 50, बिलासपुर में 21, चंबा में 31, हमीरपुर में 28, कांगड़ा में 51, किन्नौर में 4, कुल्लू में 22, लाहौल स्पिति में 4, मंडी में 26, शिमला में 32, सिरमौर में19 और ऊना जिला में 25 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं। इन स्पॉट पर अधिकतर सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। आपातकाल सेवा 108 ने सरकार के सहयोग से ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए हैं।
